केंद्र सरकार के कर्मचारी 8वें वेतन आयोग को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं और इसकी सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आयोग अपनी रिपोर्ट वर्ष 2027 की पहली छमाही तक सरकार को सौंप सकता है। इसी बीच विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों की सूची आयोग के सामने रखनी शुरू कर दी है।
DA और DR के मौजूदा इंडेक्स पर पुनर्विचार की मांग
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनर्स के महंगाई राहत (DR) की गणना प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि मौजूदा इंडेक्स वास्तविक महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को सही तरीके से नहीं दर्शा पा रहा है, जिससे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल DA और DR की गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर की जाती है। यह सूचकांक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई से राहत देने का मुख्य आधार माना जाता है।
महंगाई के सही आकलन पर उठे सवाल
AIDEF ने 8वें वेतन आयोग को भेजे अपने दूसरे पूरक सुझाव में कहा है कि 2022-23 में संशोधित किए गए CPI बास्केट में खाद्य वस्तुओं और मौसमी कृषि उत्पादों की बढ़ती कीमतों का सही प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है।
फेडरेशन के अनुसार, वर्तमान इंडेक्स में खाद्य पदार्थों का हिस्सा घटकर लगभग 36.75% रह गया है, जो वास्तविक घरेलू खर्च के पैटर्न को सही तरीके से नहीं दर्शाता। इसी कारण कर्मचारियों की व्यक्तिगत महंगाई दर और सरकारी आंकड़ों में अंतर देखा जा सकता है।
कर्मचारियों और पेंशनरों की स्थिति पर चिंता
संगठन ने यह भी बताया कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे ज्यादा असर रिटायर्ड कर्मचारियों पर पड़ रहा है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 60% DA मिल रहा है, जबकि पेंशनभोगियों को भी 60% DR दिया जा रहा है।
हाल ही में अप्रैल 2026 में इन भत्तों में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि, AIDEF का मानना है कि मौजूदा महंगाई दर को देखते हुए यह वृद्धि पर्याप्त नहीं है और इंडेक्स में व्यापक सुधार की जरूरत है।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग से पहले DA और DR की गणना प्रणाली को लेकर उठ रही यह मांगें सरकार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही हैं। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि महंगाई को मापने वाले इंडेक्स को अधिक वास्तविक और संतुलित बनाया जाए, ताकि वेतन और पेंशन वृद्धि सही ढंग से तय की जा सके।