घर खरीदने के लिए EPF निकालने से पहले जान लें ये नुकसान, रिटायरमेंट पर पड़ सकता है भारी असर

Saroj kanwar
6 Min Read

हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि उसका अपना एक घर हो। इस सपने को पूरा करने के लिए लोग वर्षों तक बचत करते हैं और जरूरत पड़ने पर होम लोन का सहारा भी लेते हैं। ऐसे में कई नौकरीपेशा कर्मचारियों के मन में यह सवाल आता है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में जमा राशि का इस्तेमाल डाउन पेमेंट या होम लोन का बोझ कम करने के लिए किया जाए या नहीं।

हालांकि, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कुछ शर्तों के साथ घर खरीदने के लिए EPF से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की सुविधा देता है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ इसे अंतिम विकल्प मानते हैं। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के लिए जमा इस फंड को समय से पहले निकालना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर असर डाल सकता है।

घर खरीदने से पहले इन बातों पर जरूर करें विचार

  • EPFO 5 साल की लगातार नौकरी पूरी करने के बाद घर खरीदने, प्लॉट लेने या मकान निर्माण के लिए EPF से आंशिक निकासी की अनुमति देता है।
  • EPF में जमा रकम पर मिलने वाला चक्रवृद्धि (Compounding) ब्याज लंबे समय में बड़ी पूंजी तैयार करता है।
  • समय से पहले निकासी करने पर रिटायरमेंट के लिए बनने वाला फंड कम हो जाता है।
  • होम लोन लेने पर मिलने वाले टैक्स लाभ भी EPF निकालने की तुलना में अधिक फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

घर खरीदने के लिए EPF निकासी के नियम

EPFO के नियमों के अनुसार, यदि कर्मचारी ने कम से कम 5 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, तो वह निम्न परिस्थितियों में EPF खाते से धन निकाल सकता है।

  • प्लॉट खरीदने के लिए – अधिकतम 24 महीने के बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते (DA) के बराबर राशि।
  • तैयार मकान या फ्लैट खरीदने के लिए – अधिकतम 36 महीने के बेसिक वेतन और DA के बराबर राशि।
  • हाउसिंग सोसाइटी के जरिए घर खरीदने पर – EPF खाते में जमा कुल राशि का 90% तक निकाला जा सकता है।

हालांकि नियम इसकी अनुमति देते हैं, लेकिन वित्तीय दृष्टि से यह निर्णय हमेशा लाभदायक नहीं माना जाता।

घर खरीदने के लिए EPF निकालने के 4 बड़े नुकसान

1. कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा छूट जाता है

EPF पर वर्तमान में 8.25% की दर से सुरक्षित और टैक्स-फ्री ब्याज मिलता है। यदि कोई कर्मचारी 30–35 वर्ष की उम्र में अपने EPF से ₹5 लाख निकाल लेता है, तो वही राशि अगले 25 वर्षों में चक्रवृद्धि ब्याज के कारण लगभग ₹36–38 लाख तक पहुंच सकती थी। यानी आज निकाले गए ₹5 लाख भविष्य में कई गुना अधिक संपत्ति बनने का मौका खो देते हैं।

2. रिटायरमेंट फंड कमजोर हो जाता है

अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए EPF ही रिटायरमेंट का सबसे बड़ा सहारा होता है। यदि कार्यकाल के बीच में इस राशि का बड़ा हिस्सा निकाल लिया जाए, तो रिटायरमेंट के समय आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

3. होम लोन पर मिलने वाले टैक्स लाभ कम हो सकते हैं

अगर आप अधिक डाउन पेमेंट के लिए EPF का उपयोग करते हैं, तो होम लोन की राशि कम हो जाएगी। इससे होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।

  • धारा 24(b) के तहत ब्याज भुगतान पर सालाना ₹2 लाख तक टैक्स छूट।
  • धारा 80C के तहत मूलधन चुकाने पर ₹1.5 लाख तक टैक्स लाभ।

4. पैसा कम लिक्विड एसेट में फंस जाता है

EPF एक सुरक्षित बचत साधन है, जबकि घर या रियल एस्टेट एक इलिक्विड एसेट है। जरूरत पड़ने पर संपत्ति को तुरंत नकदी में बदलना आसान नहीं होता, जबकि रिटायरमेंट पर EPF की राशि आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

EPF का ब्याज या होम लोन, कौन है ज्यादा फायदेमंद?

पैरामीटरEPFहोम लोन
ब्याज दर8.25% (सुरक्षित)लगभग 8.30%–8.75%
टैक्स लाभपूरी तरह टैक्स-फ्रीब्याज और मूलधन दोनों पर टैक्स छूट
प्रभावी लागतबेहतर रिटर्नटैक्स छूट के बाद प्रभावी ब्याज लगभग 6.5%–7%

विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स लाभ जोड़ने के बाद होम लोन की वास्तविक लागत कम हो जाती है। ऐसे में केवल लोन कम करने के लिए EPF निकालना वित्तीय रूप से सही निर्णय नहीं माना जाता।

घर खरीदने के लिए बेहतर विकल्प

यदि आपको डाउन पेमेंट की व्यवस्था करनी है, तो इन विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD) या लिक्विड/डेट म्यूचुअल फंड का उपयोग करें।
  • होम लोन की अवधि बढ़ाकर EMI कम रखें और भविष्य में अतिरिक्त भुगतान (Prepayment) करें।
  • अनुपयोगी संपत्तियों या अतिरिक्त सोने जैसी परिसंपत्तियों को बेचकर डाउन पेमेंट जुटाएं।
  • यदि पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है, तो 1–2 साल तक घर खरीदने की योजना टालकर SIP के जरिए डाउन पेमेंट फंड तैयार करें।

निष्कर्ष

घर खरीदना जीवन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, लेकिन इसके लिए रिटायरमेंट की बचत को समय से पहले खर्च करना समझदारी नहीं मानी जाती। EPF का उद्देश्य भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए इस फंड को यथासंभव सुरक्षित रहने दें और घर खरीदने के लिए होम लोन, नियमित बचत तथा अन्य निवेश विकल्पों का संतुलित उपयोग करें। इससे वर्तमान का सपना भी पूरा होगा और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा भी बनी रहेगी।

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