अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के दौरान इजरायल की रक्षा के लिए अपनी सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘थाड’ (THAAD) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने अब तक अपने कुल THAAD इंटरसेप्टर स्टॉक का लगभग आधा हिस्सा उपयोग कर लिया है। यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इजरायल को ईरानी मिसाइल हमलों से बचाने के लिए 200 से ज्यादा THAAD इंटरसेप्टर दागे। इसके अलावा, पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात अमेरिकी नौसैनिक जहाजों से 100 से अधिक ‘स्टैंडर्ड मिसाइल-3’ और ‘स्टैंडर्ड मिसाइल-6’ का इस्तेमाल भी किया गया। इन उन्नत रक्षा प्रणालियों का उद्देश्य ईरानी बैलिस्टिक और लंबी दूरी की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करना था।
दूसरी ओर, इजरायल ने भी अपनी रक्षा प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया। बताया गया है कि उसने 100 से कम ‘एरो’ इंटरसेप्टर और करीब 90 ‘डेविड्स स्लिंग’ मिसाइलों को लॉन्च किया। इनमें से कुछ मिसाइलों का इस्तेमाल यमन और लेबनान में ईरान समर्थित समूहों द्वारा दागे गए हमलों को रोकने के लिए किया गया।
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के सैन्य ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई शुरू की थी। इस हमले में ईरान के कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं के मारे जाने की खबर सामने आई, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का नाम भी शामिल बताया गया। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सहयोगियों और ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए।
लगातार बढ़ते संघर्ष के बीच 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को खत्म करने के लिए शांति वार्ता शुरू हुई। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू होती है तो अमेरिका को और अधिक इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इजरायली सेना ने अपनी कुछ मिसाइल रक्षा बैटरियों को रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद किया है, जिससे अमेरिकी रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष दोबारा भड़कता है तो सैन्य संसाधनों का असंतुलन और अधिक गहरा हो सकता है।
पेंटागन ने इस पूरे अभियान में अमेरिका और इजरायल के बीच समन्वय को सफल बताया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान दोनों देशों ने रक्षा जिम्मेदारियों को बराबरी से निभाया और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, ड्रोन रोधी सिस्टम और मिसाइल रक्षा तकनीकों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया।
वहीं, वाशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास ने भी संयुक्त अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन रोरिंग लॉयन’ और ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान दोनों देशों के बीच बेहद करीबी रणनीतिक सहयोग देखने को मिला, जो साझा सुरक्षा हितों के लिए जरूरी था।