मोदी–मेलोनी मुलाकात से चीन पर बढ़ी नजर, क्या है ‘ग्रेट इटली डिवोर्स’ की चर्चा?

Saroj kanwar
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सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ “मेलोडी” मीम्स और रील्स का दौर चलता रहा, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर भारत और इटली के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की नींव मजबूत होती दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की हालिया बातचीत और मुलाकात को सिर्फ औपचारिक घटना नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इटली की चीन से दूरी और “ग्रेट इटली डिवोर्स” का प्रभाव

कुछ साल पहले इटली ने चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल होकर एक बड़ा कदम उठाया था और यह उस समय G7 देशों में एकमात्र ऐसा देश था। लेकिन बाद में राजनीतिक बदलावों और नई सरकार के सत्ता में आने के बाद इटली ने धीरे-धीरे चीन से अपनी रणनीतिक दूरी बढ़ानी शुरू की।

इसी बदलाव को कई विश्लेषक “ग्रेट इटली डिवोर्स” के रूप में देखते हैं, जिसमें इटली ने चीन-केंद्रित आर्थिक निर्भरता को कम करते हुए नए वैश्विक साझेदारों की तलाश शुरू की।

भारत की ओर बढ़ता इटली का रुख

चीन से दूरी बनाने के बाद इटली के सामने एक मजबूत और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार की आवश्यकता थी। इसी संदर्भ में भारत एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभरा।

भारत और इटली के बीच बढ़ती नजदीकी केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार व्यापार, तकनीक और निवेश तक होता दिखाई दे रहा है। दोनों देश अब आपसी सहयोग को दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

IMEC कॉरिडोर: वैश्विक व्यापार का नया रास्ता

भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) इस साझेदारी का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को और तेज और कुशल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इटली की भौगोलिक स्थिति इसे इस कॉरिडोर में एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनाती है। भारत से आने वाला निर्यात जब यूरोपीय बाजारों में पहुंचेगा, तो इटली एक प्रमुख लॉजिस्टिक और ट्रांजिट हब की भूमिका निभा सकता है।

यह व्यवस्था भविष्य में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को चीन पर निर्भरता से कम करने की दिशा में एक रणनीतिक विकल्प के रूप में देखी जा रही है।

रक्षा क्षेत्र में भारत-इटली सहयोग

भारत और इटली के बीच सहयोग का एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र रक्षा उद्योग है। अब तक भारत कई सैन्य जरूरतों के लिए रूस और फ्रांस जैसे देशों पर निर्भर रहा है, लेकिन बदलते समय में “मेक इन इंडिया” के तहत नई साझेदारियों पर जोर बढ़ा है।

इटली की कंपनियां अब भारत में संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों के निर्माण और तकनीकी सहयोग में भागीदारी बढ़ा रही हैं। इसमें आधुनिक रडार सिस्टम और समुद्री सुरक्षा तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन

भारत और इटली की यह बढ़ती साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह सहयोग यूरोप और एशिया के बीच नए आर्थिक पुल का निर्माण कर सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार में चीन की भूमिका पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री मेलोनी की बढ़ती कूटनीतिक केमिस्ट्री को केवल सोशल मीडिया ट्रेंड या हल्के-फुल्के मीम्स के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे एक गहरी रणनीतिक सोच है, जो भारत और इटली दोनों के लिए आने वाले दशकों में आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिरता का आधार बन सकती है।

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