Silver Gold Price: मंगलवार, 21 जुलाई को हफ्ते के दूसरे कारोारी सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित किया, जिससे बुलियन बाजार को सहारा मिला। हालांकि, अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना ने इस तेजी को सीमित कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड इंट्राडे कारोबार के दौरान 4,041 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के बाद 0.34% की बढ़त के साथ 4,029.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं COMEX सिल्वर भी 0.13% चढ़कर 57.145 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
दो बड़े फैक्टर्स तय कर रहे हैं बुलियन की दिशा
फिलहाल सोने-चांदी का बाजार दो प्रमुख कारकों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर पश्चिम एशिया में जारी तनाव सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग को बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई का दबाव बढ़ा रही हैं, जिससे यह संभावना मजबूत हो रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल के अंत तक ब्याज दरों में फिर बढ़ोतरी कर सकता है।
तेल की कीमतों का सोने पर क्यों पड़ता है असर?
मंगलवार को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 0.4% गिरकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड लगभग 82.47 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा।
इसके बावजूद बाजार पूरी तरह निश्चिंत नहीं है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की चेतावनी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या उनमें और वृद्धि कर सकता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों की आकर्षण क्षमता को कम करती हैं।
फेड की नीति ने सोने की तेजी पर लगाया ब्रेक
कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीपी कायनात चैनवाला के अनुसार, स्पॉट गोल्ड फिलहाल 4,020 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना हुआ है, जबकि चांदी 57 डॉलर प्रति औंस के ऊपर वापस पहुंच चुकी है। हालांकि, बाजार पहले से ही इस संभावना को कीमतों में शामिल कर चुका है कि साल के अंत तक फेड कम से कम एक और बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीति निर्माताओं के सख्त रुख और हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने सितंबर में संभावित रेट हाइक की उम्मीदों को और मजबूत किया है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव से मिलने वाला सपोर्ट भी बुलियन की तेजी को ज्यादा आगे नहीं बढ़ा पा रहा।
आगे सोना और चांदी कितने ऊपर जा सकते हैं?
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च के वीपी जतिन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों ने सोने में रिकवरी को समर्थन दिया है। हालांकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर, महंगे कच्चे तेल और फेड की संभावित सख्त मौद्रिक नीति के कारण तेजी पर दबाव बना हुआ है।
घरेलू बाजार की बात करें तो उनके मुताबिक MCX गोल्ड के लिए 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा सकता है, जबकि 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम निकट अवधि का महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस रहेगा।
चांदी में भी लौटी मजबूती
हालिया गिरावट से उबरने के बाद चांदी ने सोने के मुकाबले अपेक्षाकृत बेहतर मजबूती दिखाई है। हालांकि, दोनों कीमती धातुओं की आगे की चाल अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति पर काफी हद तक निर्भर रहेगी।