पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद देश के प्रमुख निजी बैंकों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और यस बैंक के शेयरों में हुई बिकवाली से केवल चार कारोबारी दिनों में इन चार बैंकों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी आई। हालांकि, कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा अवसर साबित हो सकती है।
चार दिनों में बैंकिंग शेयरों पर भारी दबाव
जून तिमाही के नतीजे जारी होने के बाद बाजार ने निजी बैंकों के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। पूरे सप्ताह के दौरान एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के शेयर लगभग 9% तक टूट गए, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक और यस बैंक के शेयरों में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई।
इन प्रमुख बैंकों में कमजोरी का असर पूरे बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स चार कारोबारी सत्रों में 4% से अधिक लुढ़क गया।
सिर्फ बैंक रिजल्ट नहीं, वैश्विक हालात भी बने वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे केवल बैंकों के तिमाही नतीजे जिम्मेदार नहीं थे। इसी दौरान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण पूरे शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला और निफ्टी 50 इंडेक्स भी पिछले चार कारोबारी सत्रों में करीब 2% गिर गया।
गिरावट के बाद वैल्यूएशन हुआ आकर्षक
हालांकि निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कई मार्केट एक्सपर्ट इसे खरीदारी का मौका मान रहे हैं।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का कहना है कि मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और कम एनपीए को देखते हुए बैंकिंग शेयर अब आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं।
एक्सिस बैंक बना ब्रोकरेज की पहली पसंद
इक्विरस सिक्योरिटीज ने पहली तिमाही के नतीजों के बाद एक्सिस बैंक को अपनी सबसे पसंदीदा बैंकिंग स्टॉक बताया है। इसके बाद उसने एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक को प्राथमिकता दी है।
ब्रोकरेज का मानना है कि आईसीआईसीआई बैंक लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। बैंक के बेहतर मार्जिन, मजबूत मुनाफे और अच्छी लोन ग्रोथ ने इसे मजबूत स्थिति में रखा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी अच्छी संभावनाओं का बड़ा हिस्सा पहले ही शेयर कीमत में शामिल हो चुका है और फिलहाल यह करीब 17 गुना पी/ई वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है।
एक्सिस बैंक में सुधार के संकेत
इक्विरस के अनुसार एक्सिस बैंक अब बेहतर कमाई के नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।
ब्रोकरेज के मुताबिक—
- नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) अब निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है।
- रिटेल लोन वितरण में सुधार देखने को मिल रहा है।
- जमा (Deposits) पर लागत का दबाव कम हो रहा है।
- मजबूत प्रोविजनिंग बफर भविष्य के संभावित जोखिमों से निपटने में मदद करेगा।
एचडीएफसी बैंक पर भी बरकरार है भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि एचडीएफसी बैंक अब भी मजबूत बुनियादी स्थिति वाला बैंक है। हालांकि निकट अवधि में इसके मार्जिन में सुधार धीरे-धीरे देखने को मिल सकता है, क्योंकि बैलेंस शीट के सामान्य होने और FCNR(B) से जुड़े दबाव का असर अभी बना हुआ है। इसलिए इस शेयर में निवेश का नजरिया मध्यम से लंबी अवधि का रखा जाना चाहिए।
मैक्वेरी ने भी बनाए रखा भरोसा
वैश्विक ब्रोकरेज मैक्वेरी ने भी पहली तिमाही के नतीजों के बाद आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक पर अपनी ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग कायम रखी है।
ब्रोकरेज का कहना है कि—
- आईसीआईसीआई बैंक का मुनाफा अनुमान से बेहतर रहा।
- एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक मौजूदा स्तर पर उचित वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं।
- वहीं कोटक महिंद्रा बैंक पर उसने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है।
जून तिमाही में किस बैंक का प्रदर्शन कैसा रहा?
एचडीएफसी बैंक
- शुद्ध मुनाफा: 19,060 करोड़ रुपये (5% वार्षिक वृद्धि)
- नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): 33,534 करोड़ रुपये (7% वृद्धि)
एक्सिस बैंक
- शुद्ध मुनाफा: 23% बढ़ा
- NII: 8% की वृद्धि
कोटक महिंद्रा बैंक
- शुद्ध मुनाफा: 26% बढ़ा
- NII: 9% बढ़ी
यस बैंक
- शुद्ध मुनाफा: 34% की बढ़ोतरी
- NII: 18% की वृद्धि, चारों बैंकों में सबसे तेज बढ़त
आईसीआईसीआई बैंक
- स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा: 14,805 करोड़ रुपये (16% वार्षिक वृद्धि)
- NII: लगभग 13% बढ़ी
निष्कर्ष
पहली तिमाही के नतीजों के बाद निजी बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट ने निवेशकों को झटका जरूर दिया है, लेकिन कई प्रमुख ब्रोकरेज हाउस इसे लंबी अवधि के नजरिए से सकारात्मक अवसर मान रहे हैं। मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर क्रेडिट ग्रोथ और सीमित एनपीए जैसे कारक अब भी बैंकिंग सेक्टर के पक्ष में हैं। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने वाले अहम कारक बने रहेंगे।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।