Old Monk से McDowell’s No. 1 तक! इन बड़े शराब ब्रांड्स पर लगा बैन, जानिए FSSAI ने क्यों लिया सख्त फैसला

Saroj kanwar
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FSSAI Action on Alcohol Brands: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब के कुछ लोकप्रिय ब्रांड्स के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि कुछ कंपनियां शराब को प्राकृतिक तरीके से एज (पुराना) करने के बजाय उसमें आर्टिफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही थीं। FSSAI के मुताबिक, इस तरह की प्रक्रिया खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।

इस कार्रवाई की सूची में Old Monk के तीन वेरिएंट्स के साथ-साथ कई चर्चित व्हिस्की और रम ब्रांड्स के नाम शामिल हैं।

किन शराब ब्रांड्स पर हुई कार्रवाई?

FSSAI की जांच के दायरे में कई प्रमुख शराब निर्माता और उनके उत्पाद आए हैं। इनमें शामिल हैं:

Old Monk के तीन वेरिएंट्स पर रोक

लोकप्रिय रम ब्रांड Old Monk के The Legend, Gold Reserve और XXX Matured Rum वेरिएंट्स पर कार्रवाई की गई है। इन उत्पादों का निर्माण महाराष्ट्र के खोपोली स्थित Mohan Rocky Springwater की यूनिट में किया जाता है।

McDowell’s No. 1 भी सूची में

United Spirits की बारामती स्थित यूनिट में तैयार होने वाली McDowell’s No. 1 Rum भी FSSAI की कार्रवाई के दायरे में आई है।

Bagpiper Deluxe और Old Cask Deluxe XXX Rum

मध्य प्रदेश में INBREW Beverages की ओर से बनाए जाने वाले Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum पर भी कार्रवाई की गई है।

McDowell’s Celebration Rum और Central Province Whisky

मध्य प्रदेश स्थित Associated Alcohol & Breweries की यूनिट में तैयार होने वाले McDowell’s Celebration Rum और Central Province Whisky को भी सूची में शामिल किया गया है।

Antiquity Blue और Royal Challenge Whisky

United Spirits की मध्य प्रदेश यूनिट में निर्मित Antiquity Blue Whisky और Royal Challenge Whisky भी FSSAI की जांच और कार्रवाई के दायरे में हैं।

इसके अलावा, गोवा स्थित Mandexi Distilleries and Breweries में भी निरीक्षण किया गया है। वहीं महाराष्ट्र के छह अन्य निर्माताओं को अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं।

Old Monk की ‘7 साल पुरानी’ रम के दावे पर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने खास तौर पर Old Monk XXX Rum की लेबलिंग और उसकी उम्र से जुड़े दावे पर सवाल उठाए हैं। कंपनी इस उत्पाद को “7 साल पुरानी ब्लेंडेड रम” के तौर पर पेश करती है।

जांच में कथित तौर पर पाया गया कि इस मिश्रण में बड़ी मात्रा में न्यूट्रल और अनमैच्योर स्पिरिट मौजूद है, जबकि मैच्योर रम स्पिरिट की मात्रा 5 फीसदी से भी कम बताई गई है।

नियमों के मुताबिक, अगर किसी शराब उत्पाद पर उसकी उम्र का दावा किया जाता है, तो उस ब्लेंड में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट को आधार माना जाना चाहिए। इसी वजह से लेबल पर किए गए उम्र संबंधी दावों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

Artificial Flavour को लेकर FSSAI ने क्या कहा?

FSSAI ने 2 अगस्त को जारी एक प्रेस रिलीज में आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। प्राधिकरण के अनुसार, ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय मानक नहीं है जिसमें रम में अलग से “रम फ्लेवर” या व्हिस्की में “व्हिस्की फ्लेवर” मिलाने की व्यवस्था हो।

लैब जांच में कुछ उत्पादों में ऐसे कृत्रिम फ्लेवर पाए जाने की बात सामने आई, जिनका इस्तेमाल शराब के प्राकृतिक स्वाद और खुशबू की नकल करने के लिए किया गया था।

FSSAI के अनुसार, रम में कॉफी या वनीला जैसे अलग फ्लेवर का इस्तेमाल एक अलग श्रेणी के उत्पाद के रूप में किया जा सकता है। लेकिन रम में ही कृत्रिम रूप से रम का फ्लेवर जोड़ना उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में भ्रमित कर सकता है।

ऐसे उत्पादों को “Flavoured Rum” या “Premix Rum” जैसी श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा

FSSAI की कार्रवाई के बाद यह विवाद अदालत तक भी पहुंच गया है। Diageo India ने प्राधिकरण के आदेश को Bombay High Court में चुनौती दी है।

कंपनी का कहना है कि उसकी लेबलिंग प्रक्रिया पर कोई कानूनी रोक नहीं है और वह उद्योग में लंबे समय से अपनाए जा रहे मानकों के अनुरूप काम कर रही है।

फिलहाल, शराब उत्पादों की लेबलिंग, एजिंग और आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर FSSAI की कार्रवाई ने इंडस्ट्री में चर्चा तेज कर दी है। इस पूरे मामले में आगे अदालत और नियामक की ओर से आने वाले फैसलों पर नजर रहेगी।

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