सावन में नॉन-वेज ही नहीं, इन 5 शाकाहारी चीजों से भी करें परहेज, आयुर्वेद और साइंस ने बताए कारण

Saroj kanwar
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सावन का महीना शुरू होते ही भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ लोगों की खानपान की आदतों में भी बदलाव देखने को मिलता है। इस दौरान कई लोग सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं और प्याज-लहसुन सहित कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं। हालांकि, इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यताएं ही नहीं, बल्कि मौसम से जुड़े कुछ स्वास्थ्य कारण भी माने जाते हैं।

मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया, फंगस और दूसरे सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही, इस मौसम में पाचन तंत्र भी पहले की तुलना में संवेदनशील हो सकता है। यही वजह है कि सावन में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करने की सलाह दी जाती है।

आइए जानते हैं ऐसी 5 शाकाहारी चीजों के बारे में, जिन्हें सावन में खाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ और चौलाई जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, लेकिन बरसात में इन्हें साफ करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नमी के कारण पत्तियों पर कीड़े, बैक्टीरिया और फंगस लगने की संभावना बढ़ जाती है।

यदि इन्हें ठीक से साफ और पकाया न जाए, तो पेट से जुड़ी परेशानी या संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए मानसून में इनका सेवन करते समय अच्छी तरह धोने और पर्याप्त पकाने पर ध्यान देना जरूरी है।

2. मशरूम

मशरूम को प्रोटीन और कई पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन इसे खरीदते और स्टोर करते समय सावधानी जरूरी है। नमी वाला मौसम मशरूम को जल्दी खराब कर सकता है।

अगर मशरूम ताजा नहीं है या उसे सही तापमान पर स्टोर नहीं किया गया है, तो उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव बढ़ सकते हैं। ऐसे मशरूम का सेवन पेट दर्द, उल्टी या पाचन संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।

3. बैंगन

सावन के दौरान कई घरों में बैंगन से दूरी बनाने की परंपरा रही है। इसका एक कारण मानसून में फसल पर कीड़े लगने की संभावना भी बताई जाती है। इसलिए बाजार से बैंगन खरीदते समय उसे अच्छी तरह जांचना चाहिए।

कुछ लोगों को बैंगन खाने से एलर्जी या पेट से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लोगों को खासतौर पर इसका सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

4. फूलगोभी और पत्तागोभी

बरसात में फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियों में छोटे कीड़े और लार्वा छिपे होने की संभावना रहती है। इन्हें केवल ऊपर से धो लेना हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकता।

अगर आप मानसून में इन सब्जियों का सेवन कर रहे हैं, तो इन्हें अच्छी तरह अलग-अलग करके साफ करें और पर्याप्त गर्मी पर पकाएं। इससे भोजन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।

5. बहुत ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना

सावन में केवल कुछ सब्जियों से परहेज करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि भोजन बनाने के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। बहुत अधिक तेल, मसाले और तला हुआ खाना पेट पर भारी पड़ सकता है।

मानसून के दौरान ऐसे भोजन से गैस, एसिडिटी, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं कुछ लोगों में बढ़ सकती हैं। इसलिए इस मौसम में हल्का, ताजा और कम तेल-मसाले वाला भोजन बेहतर विकल्प हो सकता है।

सावन में सात्विक भोजन को क्यों दी जाती है प्राथमिकता?

सावन के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इस मौसम में ताजा और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना उपयोगी हो सकता है।

मानसून में नमी बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों के जल्दी खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए भोजन की साफ-सफाई, ताजगी और सही तरीके से पकाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इस मौसम में कई लोग मौसमी फल, दूध, सूखे मेवे, मूंग दाल और लौकी, तोरी, कद्दू तथा परवल जैसी हल्की सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। दही भी कुछ लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, हालांकि यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पाचन क्षमता पर निर्भर करता है।

ध्यान रखें: किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। साफ-सफाई, ताजगी, सही स्टोरेज और अच्छी तरह पकाना मानसून में भोजन को सुरक्षित रखने के महत्वपूर्ण तरीके हैं।

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