खरीफ सीजन में करें मोटे अनाज की खेती, मिलेगी 2,000 रुपए की सब्सिडी, ऐसे उठाएं लाभ

Saroj kanwar
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खरीफ फसलों की बुआई का समय आने वाला है। मानसून के साथ ही किसान अपने खेत में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर देंगे। खरीफ के फसलों में मोटे अनाज को शामिल किया जाता है। कई किसान ज्वार, बाजरा, रागी, सांवा, चीना जैसे माेटे अनाज की खेती करते हैं। मोटे अनाज को लेकर पीएम मोदी भी इसके गुण बता चुके हैं। मोटे अनाज को लेकर के राज्य सरकारी मिलेट्स प्रोग्राम चला रही है जिसके तहत किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है राज्य सरकार की ओर से मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों का अनुदान तो दिया ही जा रहा है इसके अलावा उन्हें ₹2000 प्रोत्साहित राशि भी दी जा रही है। सरकार चाहती है कि राज्य में किसान मोटे अनाज की खेती करें ताकि कम पानी में अधिक पैदावार प्राप्त हो जा सके।

मोटा अनाज काफी पौष्टिक माना जाता है

वैसे भी मोटा अनाज काफी पौष्टिक माना जाता है। ऐसे में इसे भोजन में शामिल किया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने मोटे अनाज का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है। राज्य में पहली बार मोटे अनाज की खेती को लेकर खरीफ सीजन के लिए लक्ष्य का तय किया गया है। मोटे अनाज को लेकर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार इस योजना के तहत विभिन्न क्लस्टर में इसकी खेती की जाएगी। एक क्लस्टर के लिए अधिकतम 25 एकड़ क्षेत्र रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ,राज्य में करीब 4115 एकड़ क्षेत्र में ज्वार , बाजार ,रागी ,सांवा, कोदो और चीना की खेती खेती की जाएगी । इसके साथ ही राज्य सरकार ने मोटे अनाज के तहत फसलों को लेकर भी लक्ष्य निर्धारित कर दिया है । किसानों को मोटे अनाज जनवार ,बाजार , रावी , सांवा कोदो और चीना के बीज उपलब्ध कराने के साथ किसानों को इन मोटे अनाजों की खेती के लिए ₹2000 की सब्सिडी दी जा रही है। इस अनुदान राशि को किसान अपनी खेती के लिए अपनी मनमर्जी के मुताबिक खर्च कर सकेंगे।

बिहार राज्य के मोटे अनाज का वितरण ‘पहले और पहले पाओ’ की तर्ज पर किया जाएगा

बिहार राज्य के मोटे अनाज का वितरण ‘पहले और पहले पाओ’ की तर्ज पर किया जाएगा। इसके लिए तैयार की जा रही है इसमें इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि किस को समय पर भी उपलब्ध हो किसानों को मोटे अनाज के बीच पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर दिया जाएगा इसके लिए तैयारियां की जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो पहली बार मोटे अनाज की खेती के लिए खरीफ सीजन लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसमें अलग-अलग मोटे अनाज के लिए करीब 210 क्विंटल बीज की जरूरत होगी। बीज वितरण की तैयारी की जा रही है।

लाभार्थी किसान को अधिकतम 5 एकड़ क्षेत्र में अनुदान दिया जाएगा

बिहार के अलावा झारखंड राज्य में भी किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ये मोटे अनाज की खेती के लिए किसानों को प्रति एकड़ ₹3000 का अनुदान दिया जाएगा। लाभार्थी किसान को अधिकतम 5 एकड़ क्षेत्र में अनुदान दिया जाएगा। इस तरह किसान मोटे अनाज की खेती पर अधिकतर ₹15000 का आप लाभ उठा सकते हैं। यह योजना राज्य के किसानों के लिए 2023-24 से लेकर 2027-28 पांच साल के लिए होगी। इस योजना को झारखंड राज्य के सभी जिलों के लिए लागू किया गया है। राज्य में मिलेट मिशन के तहत बाजरा, रागी, कोदो, कलमी और जंगोरा की खेती को प्रात्साहित किया जाएगा।

इस योजना के तहत बाजरे की खेती करने वाले किसानों को राष्ट्रीय किसान दिवस पर पुरस्कृत किया जाएगा

इस योजना के तहत बाजरे की खेती करने वाले किसानों को राष्ट्रीय किसान दिवस पर पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार के लिए 10 प्रगतिशील किसानों का चयन किया जाएगा। पुरस्कार के लिए चयनित किसानों को ₹50000 की राशि दी जाएगी। झारखंड में मिलेट मिशन के तहत जो किसान मोटे अनाज की खेती करना चाहते हैं वे अपने नजदीकी सीएससी या प्रज्ञा केंद्र पर जाकर अपना पंजीयन कर सकते हैं । आवेदन की लास्ट डेट 30 अगस्त 2024 इस योजना के तहत रही है रैयत और बटाईदार दोनों किस आवेदन कर सकते हैं।

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