गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार (MCX) से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक दोनों कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। चांदी में सबसे बड़ी कमजोरी देखने को मिली, जबकि सोना भी अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आ गया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और हाल के दिनों में आई तेजी के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण सोने और चांदी पर दबाव बना है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोने का आउटलुक अब भी सकारात्मक माना जा रहा है।
MCX पर सोना और चांदी के ताजा भाव
दोपहर करीब 1:42 बजे MCX पर सोना लगभग 1,350 रुपये की गिरावट के साथ 1,44,330 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी में और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी का भाव 4,419 रुपये टूटकर 2,22,579 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
घरेलू बाजार में आई इस कमजोरी का असर वैश्विक बाजार की गिरावट से भी जुड़ा माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
विदेशी बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी बनी रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना करीब 1.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,092 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, चांदी का भाव लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 59.125 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में निवेशकों का रुख फिलहाल जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ने से सोने की मांग पर असर पड़ा है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल ने बढ़ाया दबाव
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें फिर से 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। इसके साथ ही अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.675 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई।
जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो निवेशकों को बॉन्ड में बेहतर रिटर्न मिलने लगता है, जिससे सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश की मांग घट सकती है। यही कारण है कि आज सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
रिकॉर्ड हाई तक पहुंचना आसान नहीं
हाल के दिनों में गिरावट के बाद सोना और चांदी कुछ समय के लिए संभले थे, लेकिन मौजूदा कमजोरी ने यह संकेत दिया है कि इस वर्ष की शुरुआत में बने रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचना फिलहाल आसान नहीं होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अभी भी कई वैश्विक कारक सक्रिय हैं, जिनका असर आने वाले समय में कीमतों पर दिखाई देगा।
2026 के अंत तक सोने को लेकर बड़ा अनुमान
जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च के विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। इसके बाद 2027 में यह 6,300 डॉलर प्रति औंस का स्तर भी छू सकता है।
इस अनुमान से साफ है कि लंबी अवधि में सोने की संभावनाएं अभी भी मजबूत मानी जा रही हैं।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले महीनों में सोने और चांदी की दिशा कई अहम वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। इनमें प्रमुख हैं—
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी नीति।
- दुनिया में बढ़ते या घटते भू-राजनीतिक तनाव।
- केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी।
- डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की चाल।
यदि इन कारकों में बड़े बदलाव होते हैं तो सोने और चांदी की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
मुनाफावसूली भी बनी गिरावट की वजह
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सोने में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। लगातार बढ़त के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी, जिससे कीमतों में करेक्शन आया।
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार में कुछ समय तक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है या केंद्रीय बैंक दोबारा आक्रामक खरीदारी करते हैं, तो सोना फिर मजबूती दिखा सकता है।
निष्कर्ष
फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली माना जा रहा है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोने का दृष्टिकोण अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। आने वाले समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी यह तय करेंगे कि सोने-चांदी की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।