Gold Price: ट्रंप के नरम रुख के बावजूद क्यों गिर रहे सोना-चांदी? जानें 24K, 22K और 18K के ताज़ा रेट

Saroj kanwar
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का समाधान फिलहाल नहीं निकल पाया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल जरूर बढ़ी, लेकिन हालात में अचानक नरमी आने के बाद अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हाल ही में ट्रंप ने कतर, सऊदी अरब और यूएई के नेताओं की अपील के बाद ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोकने की बात कही है।

इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार सुबह कॉमेक्स बाजार में सोना करीब 8 डॉलर टूटकर लगभग 4,559 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है और इसकी कीमतों में तेजी देखी जाती है, लेकिन इस बार ट्रेंड उल्टा दिखाई दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल

वैश्विक बाजार में सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हालांकि चांदी में मामूली रिकवरी का रुख भी देखा गया है। वहीं, क्रूड ऑयल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका असर पूरी कमोडिटी मार्केट पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है, जिसके कारण सोने में वह तेज़ खरीदारी नहीं दिख रही, जो आमतौर पर ऐसे हालात में देखने को मिलती है।

घरेलू बाजार पर भी असर

भारत में भी सोने-चांदी के दाम दबाव में रहे। सोमवार के कारोबारी सत्र के अंत में घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना गिरकर करीब 157,821 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।

इसी तरह 23 कैरेट सोना घटकर लगभग 157,189 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब 144,564 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई और यह लगभग 268,040 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

क्यों बदल रहा है सोने का ट्रेंड?

आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं। लेकिन इस बार बाजार की दिशा थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी नीतिगत संकेत, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की सावधानी मिलकर सोने की कीमतों पर दबाव बना रहे हैं।

इसके अलावा पहले से बढ़े हुए आयात शुल्क का भी असर घरेलू बाजार पर देखा गया है, जिससे कीमतों में पहले तेज उछाल आया था, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय संकेतों के साथ बाजार में करेक्शन दिखाई दे रहा है।

निष्कर्ष:
भले ही वैश्विक स्तर पर तनाव बना हुआ है, लेकिन सोने-चांदी के बाजार में फिलहाल दबाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और डॉलर की चाल इन कीमतों की दिशा तय करेंगे।

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