Black Coffee for Fatty Liver: क्या ब्लैक कॉफी से फैटी लिवर ठीक हो सकता है? जानें एक्सपर्ट की राय

Saroj kanwar
6 Min Read

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें विवेक राजपूत नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया है कि नियमित रूप से ब्लैक कॉफी पीने से उनका फैटी लिवर ठीक हो गया। वीडियो में विवेक बताते हैं कि उन्होंने करीब 100 दिनों तक ब्लैक कॉफी पी और इस दौरान उनके लिवर की स्थिति में सुधार देखने को मिला। उनका SGPT लेवल भी 56 से घटकर 38 हो गया।

हालांकि, ब्लैक कॉफी पीना उनकी लाइफस्टाइल में हुआ एकमात्र बदलाव नहीं था। उन्होंने मीठी चीजों से दूरी बनाई, जिम जाना शुरू किया और सप्ताह में करीब पांच दिन एक्सरसाइज की। इन बदलावों के साथ उनका वजन भी कम हुआ।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ ब्लैक कॉफी पीने से फैटी लिवर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है?

फैटी लिवर क्या होता है?

फैटी लिवर ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो लिवर में सूजन और दूसरी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। फैटी लिवर के मामलों में लिवर एंजाइम, खासकर SGPT यानी ALT, का स्तर भी बढ़ सकता है।

SGPT एक एंजाइम है जो मुख्य रूप से लिवर की कोशिकाओं में पाया जाता है। लिवर की कोशिकाओं को नुकसान या सूजन होने पर यह एंजाइम खून में ज्यादा मात्रा में पहुंच सकता है। इसलिए SGPT का बढ़ा हुआ स्तर लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है, हालांकि केवल इस टेस्ट के आधार पर बीमारी का पूरा आकलन नहीं किया जाता।

क्या ब्लैक कॉफी फैटी लिवर में मदद कर सकती है?

इस सवाल पर नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम के लिवर ट्रांसप्लांट एंड एचपीबी सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. संजय गोजा का कहना है कि ब्लैक कॉफी लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है और फैटी लिवर को सुधारने की प्रक्रिया में मदद कर सकती है। लेकिन इसे फैटी लिवर का अकेला इलाज नहीं माना जा सकता।

कॉफी में कई बायोएक्टिव कंपाउंड और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इनमें क्लोरोजेनिक एसिड भी शामिल है। ये कंपाउंड शरीर के मेटाबॉलिज्म और लिवर के कामकाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफी का सेवन लिवर में फैट जमा होने तथा लिवर को होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

लिवर एंजाइम पर भी पड़ सकता है असर

फैटी लिवर या लिवर में सूजन जैसी स्थितियों में SGPT जैसे एंजाइम का स्तर बढ़ सकता है। कॉफी का सेवन कुछ लोगों में लिवर एंजाइम के स्तर को बेहतर करने से जुड़ा पाया गया है। इसका मतलब यह हो सकता है कि लिवर पर पड़ने वाला तनाव या सूजन कम हो रही है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का SGPT कम होने का कारण सिर्फ कॉफी ही हो, यह जरूरी नहीं है। वजन कम करना, खान-पान में सुधार, नियमित शारीरिक गतिविधि और दूसरी जीवनशैली में किए गए बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।

क्या कॉफी लिवर में स्कारिंग को रोक सकती है?

लिवर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचने पर फाइब्रोसिस यानी स्कार टिश्यू बनने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। गंभीर स्थिति में यही प्रक्रिया आगे चलकर सिरोसिस जैसी समस्या का रूप ले सकती है।

कॉफी और उसके कुछ घटकों पर हुए शोध में लिवर फाइब्रोसिस के जोखिम को कम करने की संभावित भूमिका सामने आई है। कैफीन के मेटाबॉलिज्म से बनने वाला पैराक्सैंथीन भी इस प्रक्रिया से जुड़ा हुआ माना जाता है। हालांकि, इसे किसी मौजूदा लिवर बीमारी का इलाज समझना सही नहीं होगा।

दिन में कितनी कॉफी पीनी चाहिए?

डॉ. संजय गोजा के मुताबिक, सामान्य तौर पर दिन में करीब दो कप ब्लैक कॉफी ली जा सकती है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए कैफीन की सहनशीलता अलग होती है। बहुत ज्यादा कॉफी लेने से बेचैनी, नींद में परेशानी या धड़कन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए कॉफी को सीमित मात्रा में लेना बेहतर है और उसमें ज्यादा चीनी या हाई-कैलोरी सामग्री मिलाने से बचना चाहिए।

सिर्फ ब्लैक कॉफी पर निर्भर रहना सही नहीं

फैटी लिवर में सुधार के लिए केवल ब्लैक कॉफी पीना पर्याप्त नहीं है। वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना, संतुलित आहार लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। मीठे और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी मददगार हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को डॉक्टर ने फैटी लिवर के लिए दवाएं या अन्य उपचार बताए हैं, तो उन्हें अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। वायरल वीडियो में किसी एक व्यक्ति को फायदा हुआ हो, इसका मतलब यह नहीं कि वही तरीका हर व्यक्ति के लिए समान रूप से प्रभावी होगा।

निष्कर्ष: ब्लैक कॉफी लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है और फैटी लिवर में सुधार की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसे अकेले इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। फैटी लिवर में सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज, स्वस्थ वजन और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज सबसे महत्वपूर्ण हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। फैटी लिवर, बढ़े हुए SGPT या किसी अन्य लिवर समस्या की स्थिति में उपचार और डाइट से जुड़े फैसले डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *