पान मसाला का सेवन करने वालों के लिए इससे जुड़ी पैकेजिंग में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला और चबाने वाले तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत कंपनियों को ऐसी पैकेजिंग अपनाने पर जोर दिया गया है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित हो।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन छोटे पाउच पर पड़ सकता है, जिनके जरिए बाजार में बड़े पैमाने पर पान मसाला बेचा जाता है। कंपनियों को पैकेजिंग में ऐसे विकल्पों का इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा, जिन्हें सुरक्षित तरीके से रीसायकल किया जा सके।
प्लास्टिक पाउच को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
पान मसाले को नमी और बाहरी वातावरण से बचाने के लिए लंबे समय से प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, कुछ प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आती रही हैं।
थैलेट्स और बिस्फेनॉल-ए (BPA) जैसे रसायनों को लेकर खास तौर पर चर्चा होती है। गर्मी या लंबे समय तक अनुचित परिस्थितियों में रखे जाने पर पैकेजिंग से रसायनों के खाद्य पदार्थ में जाने की संभावना को लेकर सवाल उठते हैं। यही वजह है कि खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में सुरक्षित और उपयुक्त सामग्री के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
FSSAI के नए निर्देशों से कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
FSSAI का फोकस ऐसी पैकेजिंग को बढ़ावा देने पर है, जो खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी कम नुकसानदायक हो। कंपनियों को पैकेजिंग सामग्री का चयन करते समय उसकी सुरक्षा, उपयोगिता और रीसाइक्लिंग क्षमता का ध्यान रखना होगा।
नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें जुर्माना या लाइसेंस से जुड़ी कार्रवाई जैसी सख्ती शामिल हो सकती है। इसलिए पान मसाला निर्माताओं के लिए पैकेजिंग में बदलाव करना एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।
पर्यावरण पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
पान मसाला के छोटे पाउच इस्तेमाल के बाद अक्सर खुले में फेंक दिए जाते हैं। सड़क, नाली और सार्वजनिक स्थानों पर जमा होने वाला यह कचरा पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। प्लास्टिक कचरे के कारण नालियां जाम होने के साथ मिट्टी और आसपास के पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अगर कंपनियां ज्यादा टिकाऊ और रीसायकल होने वाली पैकेजिंग की ओर बढ़ती हैं, तो इससे पान मसाला पैकेट से पैदा होने वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
बदल सकती है पान मसाला की कीमत
पैकेजिंग में बदलाव का सीधा असर कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है। नई पैकेजिंग के लिए अलग तरह के कच्चे माल, डिजाइन और पैकेजिंग मशीनरी की जरूरत पड़ सकती है। पेपर, पेपर बोर्ड, सेलूलोज आधारित या अन्य उपयुक्त विकल्पों की लागत मौजूदा पैकेजिंग से अलग हो सकती है।
ऐसे में कंपनियों का कुल पैकेजिंग खर्च बढ़ने की संभावना है। यदि यह अतिरिक्त लागत उत्पाद की कीमत में शामिल की जाती है, तो आने वाले समय में पान मसाला के दाम पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
नए पैकेजिंग नियमों का उद्देश्य केवल पान मसाला के पैकेट का स्वरूप बदलना नहीं है, बल्कि खाद्य पैकेजिंग को अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी है। आने वाले समय में बाजार में पान मसाला के छोटे पाउच की पैकेजिंग में बदलाव दिखाई दे सकता है और कंपनियों को नए मानकों के अनुरूप अपने पैकिंग सिस्टम को अपडेट करना पड़ सकता है।