बारिश में कार के टायर में कितना रखें प्रेशर? जानें सही PSI और जरूरी सावधानियां

Saroj kanwar
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बारिश के मौसम में सड़क पर गाड़ी चलाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पानी से भीगी सड़क पर फिसलन बढ़ जाती है, जिससे कार की ब्रेकिंग और रोड ग्रिप प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ड्राइवर आमतौर पर वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच पर ध्यान देते हैं, लेकिन टायर प्रेशर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि सुरक्षित ड्राइविंग के लिए टायर में सही मात्रा में हवा होना बेहद जरूरी है।

गलत टायर प्रेशर होने पर सड़क पर कार की पकड़ कम हो सकती है और अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए खासकर मानसून में टायर की हवा और उसकी हालत की जांच करना जरूरी है।

कितना होना चाहिए कार के टायर का प्रेशर?

टायर में हवा का दबाव मौसम के हिसाब से अपनी मर्जी से कम या ज्यादा नहीं करना चाहिए। कार निर्माता कंपनी जिस टायर प्रेशर की सलाह देती है, उसी के अनुसार हवा भरवाना सबसे सुरक्षित तरीका है। अलग-अलग कारों के लिए यह प्रेशर अलग हो सकता है।

कार का सही टायर प्रेशर आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे के पास लगे स्टिकर पर दिया होता है। इसके अलावा इसकी जानकारी वाहन की ओनर मैनुअल में भी मिल सकती है।

ज्यादा हवा भरने से क्या नुकसान है?

टायर में जरूरत से ज्यादा हवा होने पर उसका सड़क के साथ संपर्क क्षेत्र कम हो सकता है। इससे वाहन की ग्रिप प्रभावित हो सकती है। बारिश के दौरान जब सड़क पहले से ही फिसलन भरी होती है, तब अचानक ब्रेक लगाने या तेज मोड़ लेने पर कार के नियंत्रण से बाहर होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए बेहतर माइलेज या किसी अन्य वजह से टायर में निर्धारित सीमा से ज्यादा हवा भरवाना सही नहीं है।

कम टायर प्रेशर भी है खतरनाक

कुछ लोगों को लगता है कि बारिश में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ मजबूत हो जाती है। लेकिन यह धारणा सही नहीं है। कम हवा में टायर सड़क पर ज्यादा घर्षण पैदा कर सकता है, जिससे वह तेजी से घिसने लगता है और ईंधन की खपत भी बढ़ सकती है।

लंबी दूरी तक कम प्रेशर में ड्राइव करने पर टायर अधिक गर्म हो सकता है। इससे टायर को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में भी निर्माता द्वारा बताए गए प्रेशर को ही बनाए रखना चाहिए।

टायर का ट्रेड और ग्रिप भी जरूर देखें

सिर्फ हवा का दबाव सही होना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में टायर की कुल स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। खासतौर पर टायर के ट्रेड की गहराई महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि घिसे हुए टायर पानी को सड़क और टायर के बीच से सही तरीके से हटाने में कमजोर हो सकते हैं।

अगर टायर का ट्रेड काफी घिस चुका है या उसमें किसी तरह की क्षति दिखाई दे रही है, तो उसे समय रहते बदलवाना बेहतर है।

बारिश में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए इन बातों का रखें ध्यान

टायर प्रेशर को नियमित रूप से जांचते रहें और लंबी यात्रा से पहले खास तौर पर टायरों की जांच करें। सिर्फ चारों टायरों की हवा ही नहीं, बल्कि टायर की सतह, ट्रेड और किसी तरह के कट या नुकसान को भी देखें।

सही टायर प्रेशर और अच्छी स्थिति वाले टायर कार की सड़क पर पकड़ और ड्राइविंग सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानसून में सावधानी बरतकर आप न केवल कार के प्रदर्शन को बेहतर रख सकते हैं, बल्कि सफर को भी ज्यादा सुरक्षित बना सकते हैं।

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