जब किसी मरीज के बारे में यह सुनने को मिलता है कि उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है, तो परिवार और आसपास के लोगों की चिंता बढ़ जाती है। आमतौर पर लोग वेंटिलेटर को बेहद गंभीर स्थिति या आखिरी उम्मीद से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, वेंटिलेटर का मतलब यह नहीं है कि मरीज के ठीक होने की संभावना खत्म हो गई है।
दरअसल, वेंटिलेटर एक लाइफ-सपोर्ट मशीन है, जो उस समय सांस लेने में मदद करती है, जब मरीज के फेफड़े या शरीर पर्याप्त रूप से यह काम नहीं कर पाते। यह किसी बीमारी को सीधे ठीक नहीं करता, बल्कि इलाज के दौरान शरीर को जरूरी सहारा देता है।
आइए जानते हैं कि वेंटिलेटर कैसे काम करता है, मरीज को इसकी जरूरत कब पड़ती है और इससे जुड़े संभावित जोखिम क्या हैं।
वेंटिलेटर क्या होता है?
वेंटिलेटर ऐसी मेडिकल मशीन है, जो मरीज के फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है। सामान्य स्थिति में हमारा शरीर यह काम खुद करता है, लेकिन गंभीर बीमारी, संक्रमण, चोट या किसी अन्य कारण से सांस लेने की क्षमता प्रभावित होने पर वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
यदि मरीज अपने दम पर पर्याप्त सांस नहीं ले पा रहा है, तो डॉक्टर एंडोट्रेकियल ट्यूब को मुंह या नाक के रास्ते श्वासनली तक पहुंचाकर उसे वेंटिलेटर से जोड़ सकते हैं।
कुछ मरीजों को लंबे समय तक सांस की मशीन की आवश्यकता हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर गर्दन के सामने एक छोटा रास्ता बनाकर ट्यूब डालते हैं। इस प्रक्रिया को ट्रेकियोस्टॉमी कहा जाता है।
मरीज को वेंटिलेटर पर कब रखा जाता है?
PSRI Hospital की सीनियर कंसल्टेंट-पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन डॉ. नीतू जैन के अनुसार, जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही हो या मरीज प्रभावी तरीके से सांस लेने में असमर्थ हो, तब डॉक्टर वेंटिलेटर की मदद लेने का फैसला कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति कई कारणों से पैदा हो सकती है, जैसे:
- गंभीर निमोनिया या फेफड़ों का संक्रमण
- अस्थमा का बेहद गंभीर अटैक
- COPD जैसी फेफड़ों की बीमारी का गंभीर रूप से बिगड़ना
- सिर में गंभीर चोट या ब्रेन स्ट्रोक के कारण सांस नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होना
- बड़ी सर्जरी के दौरान या ऑपरेशन के बाद सांस लेने में परेशानी
- कुछ दवाओं या जहरीले पदार्थों के प्रभाव से सांस बहुत धीमी हो जाना
- गंभीर सेप्सिस या शरीर में फैला गंभीर संक्रमण
यह समझना भी जरूरी है कि ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटिलेटर एक ही चीज नहीं हैं। कई मरीजों को केवल ऑक्सीजन मास्क या अन्य गैर-इनवेसिव सपोर्ट से ही पर्याप्त मदद मिल जाती है और उन्हें वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती।
क्या वेंटिलेटर पर जाने का मतलब हालत बेहद गंभीर है?
वेंटिलेटर की जरूरत आमतौर पर तब पड़ती है, जब मरीज की सांस लेने की स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो। इसलिए इसे गंभीर बीमारी का संकेत जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मरीज के बचने या ठीक होने की उम्मीद नहीं है।
वेंटिलेटर का मुख्य उद्देश्य शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराना और सांस लेने में मदद करना है, ताकि मूल बीमारी का इलाज किया जा सके। कई मरीज बीमारी, संक्रमण या सर्जरी से रिकवरी के बाद कुछ समय में सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाए जा सकते हैं।
क्या वेंटिलेटर बीमारी को ठीक करता है?
वेंटिलेटर को लेकर सबसे आम गलतफहमियों में से एक यह है कि यह बीमारी का इलाज करता है। वास्तव में ऐसा नहीं है।