बिना बिजली कनेक्शन के भी रोशन होगा घर! जानें कितने सोलर पैनल और बैटरी की पड़ेगी जरूरत

Saroj kanwar
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अगर किसी घर में सरकारी बिजली कनेक्शन नहीं है, तो क्या सिर्फ सोलर पावर के भरोसे पूरा घर चलाया जा सकता है? इसका जवाब हां है। हालांकि, इसके लिए सामान्य सोलर सिस्टम से अलग एक ऐसा सेटअप चाहिए, जिसमें पर्याप्त क्षमता वाले सोलर पैनल के साथ बैटरी बैकअप भी मौजूद हो। इस तरह के सिस्टम को ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम कहा जाता है।

दिन के समय सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली तैयार करते हैं। इस बिजली से घर के उपकरण चलाए जा सकते हैं और जरूरत से अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर किया जा सकता है। सूर्यास्त के बाद यही बैटरी घर की बिजली की जरूरत पूरी करती है।

कैसे काम करता है ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम?

पूरी तरह सोलर पावर पर चलने वाले घर में बिजली बनाने के लिए सोलर पैनल लगाए जाते हैं। पैनल से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल उस समय घर के उपकरणों को चलाने में किया जाता है। अगर उत्पादन खपत से ज्यादा है, तो अतिरिक्त बिजली बैटरी में जमा हो जाती है।

रात के समय जब पैनल बिजली बनाना बंद कर देते हैं, तब बैटरी से घर को बिजली मिलती है। यही वजह है कि ऑफ-ग्रिड सिस्टम में बैटरी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

वहीं, ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम में सोलर पैनल के साथ सरकारी बिजली ग्रिड का कनेक्शन भी रहता है। ऑफ-ग्रिड सिस्टम की खासियत यह है कि इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि घर बिना ग्रिड कनेक्शन के भी बिजली की जरूरत पूरी कर सके।

रात में बैटरी ही होगी बिजली का मुख्य सहारा

सोलर पैनल रात में बिजली पैदा नहीं करते। इसलिए अगर घर को 24 घंटे सोलर पावर पर चलाना है, तो मजबूत बैटरी बैकअप जरूरी है।

बैटरी की क्षमता इस बात से तय होती है कि घर में रोजाना कितनी बिजली खर्च होती है और रात के दौरान कितने घंटे का बैकअप चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर रात में पंखे, लाइट, फ्रिज, टीवी और अन्य उपकरण लगातार इस्तेमाल होते हैं, तो कम क्षमता वाली बैटरी पर्याप्त नहीं होगी।

आज घरेलू सोलर सिस्टम में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इन बैटरियों में अच्छी ऊर्जा स्टोरेज क्षमता होती है और इन्हें बार-बार चार्ज किया जा सकता है।

कितने सोलर पैनल और कितनी बैटरी की जरूरत होगी?

हर घर के लिए एक जैसा सोलर सिस्टम सही नहीं होता। पैनल और बैटरी की क्षमता का चुनाव घर की बिजली खपत के आधार पर किया जाता है।

सिस्टम लगवाने से पहले कुछ जरूरी बातों का हिसाब लगाना चाहिए, जैसे:

  • रोजाना घर में कितनी यूनिट बिजली खर्च होती है।
  • दिन और रात में कितनी बिजली की जरूरत पड़ती है।
  • कितने घंटे का बैटरी बैकअप चाहिए।
  • आपके क्षेत्र में औसतन कितनी धूप उपलब्ध रहती है।
  • गर्मी और सर्दी में बिजली की खपत कितनी बदलती है।
  • घर में कितने ज्यादा बिजली खपत वाले उपकरण इस्तेमाल होते हैं।

इसलिए केवल सोलर पैनल की क्षमता देखकर सिस्टम तय करना सही तरीका नहीं है। पैनल, इन्वर्टर और बैटरी—तीनों की क्षमता घर की वास्तविक जरूरत के हिसाब से तय करनी पड़ती है।

बादल और बारिश के दिनों में कैसे चलेगा घर?

पूरी तरह सोलर पर निर्भर घर के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बादल या बारिश का मौसम हो सकता है। कम धूप मिलने पर सोलर पैनल का बिजली उत्पादन घट जाता है।

अगर बैटरी में पहले से पर्याप्त चार्ज मौजूद है, तो कुछ समय तक घर सामान्य रूप से चल सकता है। लेकिन अगर कई दिनों तक धूप कम रहे और बैटरी चार्ज न हो पाए, तो बिजली का बैकअप प्रभावित हो सकता है। ऐसे मौसम के लिए अतिरिक्त बैटरी क्षमता रखना उपयोगी हो सकता है।

AC और दूसरे भारी उपकरणों के लिए चाहिए बड़ा सिस्टम

घर में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरण समान मात्रा में बिजली नहीं लेते। फ्रिज, पानी की मोटर, कूलर, माइक्रोवेव और वॉशिंग मशीन जैसे उपकरण सोलर सिस्टम पर अतिरिक्त लोड डाल सकते हैं।

वहीं, एयर कंडीशनर (AC) को लंबे समय तक सोलर पावर से चलाने के लिए काफी ज्यादा क्षमता वाले पैनल और बड़ी बैटरी स्टोरेज की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए अगर घर में AC या दूसरे हाई-पावर उपकरण ज्यादा चलते हैं, तो सोलर सिस्टम की क्षमता उसी हिसाब से बढ़ानी होगी।

क्या बिना सरकारी बिजली के पूरा घर सोलर से चलाना संभव है?

हां, सही डिजाइन किए गए ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम से घर को सरकारी बिजली कनेक्शन के बिना भी चलाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सिर्फ सोलर पैनल लगाना काफी नहीं है। घर की रोजाना खपत, रात का बैकअप, मौसम, इस्तेमाल होने वाले उपकरण और भविष्य की बिजली जरूरत को ध्यान में रखकर पैनल, इन्वर्टर और बैटरी की क्षमता तय करनी होगी।

यानी पूरी तरह सोलर घर संभव है, लेकिन सिस्टम की सही क्षमता चुनना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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