Gold Silver Price: घरेलू और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। मजबूत अंतरराष्ट्रीय संकेत, नए निवेश और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी उम्मीदों ने कीमती धातुओं को सहारा दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई का दबाव कम होने की संभावना से फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सीधा फायदा सोने और चांदी की कीमतों को मिला।
MCX पर सोना और चांदी दोनों चमके
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 2,188 रुपये यानी 0.85% की बढ़त के साथ करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान 1,283 लॉट का कारोबार दर्ज किया गया।
वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी ने और भी तेज रफ्तार दिखाई। इसकी कीमत 8,000 रुपये यानी 3.54% बढ़कर 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। चांदी में 2,943 लॉट की ट्रेडिंग हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सिल्वर फ्यूचर्स करीब 3.44% की तेजी के साथ 61.66 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखाई दिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला मजबूत सपोर्ट
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों द्वारा नई पोजीशन बनाने और वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग ने सोने-चांदी की कीमतों को मजबूती दी है। न्यूयॉर्क के कमोडिटी बाजार में गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1.13% की बढ़त के साथ 4,287.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए।
क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?
कीमती धातुओं में आई हालिया तेजी के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण हैं। इनमें अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट, डॉलर की कमजोरी, महंगाई में राहत की उम्मीद और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की बढ़ती मांग प्रमुख मानी जा रही है।
स्मॉलकेस मैनेजर और क्वांटस रिसर्च के MD एवं CEO कार्तिक जोनागाडला के मुताबिक, COMEX गोल्ड फ्यूचर्स 3 अगस्त को लगभग 4,090 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 7 अगस्त तक 4,350 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गए। उनका कहना है कि निवेशकों ने महंगाई और आर्थिक जोखिमों का दोबारा आकलन किया, जिससे सोने में खरीदारी बढ़ी।
उन्होंने यह भी बताया कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 83 डॉलर तक आ गईं, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में भी नरमी देखने को मिली। आमतौर पर बॉन्ड यील्ड घटने से सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश आकर्षक बन जाते हैं। साथ ही, कमजोर डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता कर देता है।
अमेरिकी आंकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर
बाजार की अगली दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। खासतौर पर रोजगार और महंगाई से जुड़े डेटा निवेशकों के लिए अहम रहेंगे। यदि लेबर मार्केट कमजोर रहता है, तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ सकती है, जो सोने के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
VT Markets के सीनियर मार्केट एनालिस्ट (APAC) जस्टिन खू का कहना है कि सोने की मौजूदा तेजी केवल सुरक्षित निवेश की मांग का परिणाम नहीं है। इसके पीछे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी रोजगार बाजार की कमजोरी, ट्रेजरी यील्ड में कमी और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे कई कारकों का संयुक्त असर है।
हाल के दिनों में गोल्ड फ्यूचर्स 4,300 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच चुके हैं, जबकि चांदी भी कई सप्ताह के उच्च स्तर पर कारोबार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब बाजार की नजर अमेरिका की नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payroll) रिपोर्ट पर रहेगी। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत हो सकती है, जिससे सोने को और समर्थन मिलेगा। वहीं, मजबूत आंकड़े आने पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी आ सकती है, जिससे सोने पर दबाव बन सकता है।
कार्तिक जोनागाडला के अनुसार, 4,300 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि कीमतें इसके ऊपर टिकती हैं तो सोना 4,350 से 4,400 डॉलर प्रति औंस के दायरे में जा सकता है। हालांकि, यदि कीमत 4,200 डॉलर से नीचे फिसलती है तो मुनाफावसूली बढ़ने की संभावना रहेगी।
भारतीय बाजार पर किन बातों का पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोने की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होतीं। रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग भी कीमतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
फिलहाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 95.22 के स्तर पर है। ऐसे में रुपये में होने वाला उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों के असर को भारतीय बाजार में बढ़ा या घटा सकता है।