# GOBARधन योजना: गोबर से बायोगैस बनाकर करें कमाई, जानें पात्रता, लाभ और पूरी प्रक्रिया

Saroj kanwar
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GOBARधन योजना: अगर कोई आपसे कहे कि घर और गांव का गोबर तथा जैविक कचरा आपकी आय का बड़ा स्रोत बन सकता है, तो शायद पहले यह बात अजीब लगे। लेकिन अब यही हकीकत बनने जा रही है। वर्षों से गोबर का उपयोग खेती में खाद, ईंधन और अन्य घरेलू कार्यों के लिए होता रहा है। अब केंद्र सरकार इसी गोबर और जैविक कचरे से स्वच्छ ऊर्जा तैयार कर किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।

केंद्र सरकार ने GOBARधन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना के तहत करीब 23,731 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य गोबर, फसल अवशेष और जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाना है। खास बात यह है कि तैयार गैस की बिक्री की चिंता भी नहीं होगी, क्योंकि इसके लिए सरकार ने खरीद की व्यवस्था तय की है।

क्या है सरकार की योजना?

देश में हर साल बड़ी मात्रा में गोबर, पराली और शहरी जैविक कचरा या तो बेकार चला जाता है या फिर जला दिया जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। GOBARधन योजना के माध्यम से इसी कचरे को उपयोग में लाकर स्वच्छ ईंधन यानी Compressed Biogas (CBG) तैयार किया जाएगा। यह योजना अगले 10 वर्षों तक लागू रहेगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी।

CBG उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य देश में CBG उत्पादन को कई गुना बढ़ाना है। इससे किसानों, डेयरी संचालकों, ग्रामीण उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। खेती के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्र ऊर्जा उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

गैस की खरीद की रहेगी गारंटी

किसी भी नए कारोबार में सबसे बड़ी चिंता उत्पाद की बिक्री होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने CBG खरीद की व्यवस्था तय की है।

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से CBG खरीदना अनिवार्य किया जाएगा। तय लक्ष्य के अनुसार—

  • 2026-27: कुल गैस खरीद का 3% CBG होगा।
  • 2027-28: यह लक्ष्य बढ़ाकर 4% किया जाएगा।
  • 2028-29 से आगे: कम से कम 5% गैस CBG प्लांट से खरीदना अनिवार्य होगा।

इससे उत्पादकों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी।

तय दर पर मिलेगी आय

बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकार ने CBG के लिए 2,110 रुपये प्रति MMBTU की निश्चित दर निर्धारित की है। यह मूल्य कम से कम 10 वर्षों तक लागू रहेगा, जिससे निवेशकों और प्लांट संचालकों को अपनी आय का बेहतर अनुमान लगाने में सुविधा होगी।

प्लांट लगाने पर मिलेगी वित्तीय सहायता

CBG प्लांट स्थापित करने में भारी निवेश की आवश्यकता होती है। इसे आसान बनाने के लिए सरकार पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराएगी।

योजना के तहत पात्र परियोजनाओं को उनकी क्षमता के अनुसार प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकती है। इस राशि का उपयोग मशीनरी, कचरा संग्रहण प्रणाली और कम्पोस्टिंग जैसी सुविधाओं के विकास में किया जा सकेगा।

इसका लाभ MSME, ग्रामीण उद्यमियों, सहकारी समितियों और पंचायत स्तर की संस्थाओं को भी मिल सकता है।

पाइपलाइन और लोन में भी मिलेगा सहयोग

गैस उत्पादन के बाद उसे बाजार तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार गैस पाइपलाइन कनेक्टिविटी विकसित करने में भी सहयोग करेगी, ताकि उत्पादित CBG सीधे गैस नेटवर्क तक पहुंच सके।

इसके अलावा, बैंक ऋण लेने में आने वाली दिक्कतों को कम करने के लिए सरकार लोन गारंटी की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी। इससे परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिलने में आसानी हो सकती है।

जैविक खाद से होगी अतिरिक्त कमाई

CBG उत्पादन के बाद जो अवशेष बचता है, वह उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे प्लांट संचालकों को गैस बेचने के साथ-साथ जैविक खाद की बिक्री से भी अतिरिक्त आय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मददगार हो सकती है।

निष्कर्ष

GOBARधन योजना का उद्देश्य गोबर, कृषि अवशेष और जैविक कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलना है। इस पहल से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, प्रदूषण में कमी, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह देश के जैविक कचरे को “वेस्ट से वेल्थ” में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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