UPI Payment Update: लोकसभा से बिल पास, क्या अब UPI ट्रांजैक्शन पर देना होगा चार्ज? जानें पूरा मामला

Saroj kanwar
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। हाल ही में संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल UPI पर किसी तरह का शुल्क लगाने का फैसला नहीं किया गया है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

आखिर पूरा मामला क्या है?

सरकार ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में कुछ बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इन संशोधनों का उद्देश्य भविष्य में जरूरत पड़ने पर UPI लेनदेन पर MDR लागू करने के लिए कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अभी से UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लग जाएगा। सरकार ने न तो शुल्क तय किया है और न ही यह बताया है कि यह किन लेनदेन पर लागू होगा।

MDR क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो दुकानदार या व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं। जब कोई ग्राहक कार्ड या डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उस ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने की लागत होती है। इसी लागत की भरपाई के लिए MDR लिया जाता है। यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि व्यापारी से वसूला जाता है।

क्या आम लोगों को UPI इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने होंगे?

फिलहाल इसका जवाब नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा है कि अभी UPI पर MDR लागू करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यदि भविष्य में इसे लागू भी किया जाता है, तो इसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा बल्कि व्यापारियों पर होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापारियों की लागत बढ़ती है, तो वे सामान की कीमतें बढ़ाकर या नकद भुगतान को बढ़ावा देकर इसकी भरपाई कर सकते हैं।

सरकार का क्या कहना है?

सरकार के मुताबिक, MDR को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। इस विषय पर फैसला NPCI की UPI और सर्विस चार्जेज स्टीयरिंग कमेटी करेगी। संसद में संबंधित संशोधन पारित होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो उसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों में निवेश को मजबूत करना होगा।

अभी UPI पर कोई चार्ज क्यों नहीं लगता?

सरकार ने जनवरी 2020 से RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर MDR समाप्त कर दिया था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और नकद लेनदेन पर निर्भरता कम करना था। इसी वजह से आज करोड़ों लोग बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI का उपयोग कर रहे हैं।

पेमेंट कंपनियां MDR की मांग क्यों कर रही हैं?

डिजिटल पेमेंट कंपनियों का कहना है कि हर ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने में लागत आती है। सर्वर, साइबर सिक्योरिटी, टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम अपग्रेड पर लगातार खर्च करना पड़ता है। UPI पर MDR न होने के कारण कंपनियों के पास इन खर्चों की भरपाई का स्थायी स्रोत नहीं है। बढ़ते ट्रांजैक्शन के साथ सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ती है।

कार्ड पेमेंट पर अभी कितना MDR लगता है?

वर्तमान में क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर आमतौर पर अधिकतम 1.5% तक MDR लिया जाता है, जबकि डेबिट कार्ड पर यह करीब 0.9% तक हो सकता है। वहीं UPI ट्रांजैक्शन पर अभी कोई MDR लागू नहीं है।

RBI का क्या कहना है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि UPI पर MDR को लेकर अभी कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने यह भी माना कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम तेजी से बढ़ रहा है और भविष्य में इसे मजबूत बनाए रखने के लिए टिकाऊ फंडिंग मॉडल की आवश्यकता पड़ सकती है।

क्या पहले बड़े कारोबारियों पर लागू हो सकता है MDR?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो इसकी शुरुआत बड़े व्यापारियों या अधिक मूल्य वाले ट्रांजैक्शन से हो सकती है। हालांकि, सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

व्यापारियों और विपक्ष की क्या राय है?

CAIT के महासचिव और बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि बिल के अंतिम प्रावधान सामने आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। उनके अनुसार, यदि सरकार कोई बदलाव करती है तो उसके पीछे ठोस कारण होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर सेवाएं मिलने पर नाममात्र का शुल्क स्वीकार किया जा सकता है।

वहीं कांग्रेस ने आशंका जताई है कि भविष्य में UPI पर शुल्क लगने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर कैसी प्रतिक्रिया है?

MDR को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि व्यापारियों पर शुल्क लगाया गया तो वे इसकी भरपाई ग्राहकों से कर सकते हैं। वहीं कई यूजर्स का कहना है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत उसका मुफ्त होना है और यदि इस पर शुल्क लगाया गया तो लोग दोबारा नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं।

क्या RBI खुद UPI सिस्टम का खर्च उठा सकता है?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के पास डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सहयोग देने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। वहीं बैंकिंग सेक्टर का तर्क है कि लगातार बढ़ रहे ट्रांजैक्शन को संभालने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत होती है, इसलिए किसी स्थायी फंडिंग व्यवस्था पर विचार जरूरी है।

अगर भविष्य में MDR लागू हुआ तो क्या होगा?

फिलहाल यह पूरी तरह भविष्य का विषय है। संसद में संशोधन प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित समिति के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि MDR लागू होगा या नहीं। यदि लागू होता है तो किन व्यापारियों पर लागू होगा, किस राशि से ऊपर के ट्रांजैक्शन प्रभावित होंगे और इसका आम उपभोक्ताओं पर कितना असर पड़ेगा, यह सब बाद में तय किया जाएगा।

निष्कर्ष

लोकसभा में पारित ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026’ के बाद भविष्य में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लागू करने का कानूनी रास्ता तैयार हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अभी UPI पर कोई शुल्क लगा दिया गया है। सरकार ने न MDR की दर तय की है और न ही इसकी लागू होने की तारीख घोषित की है। मौजूदा स्थिति में UPI लेनदेन पूरी तरह मुफ्त हैं और यदि भविष्य में कोई बदलाव होता है, तो उसका अंतिम फैसला संबंधित समिति की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा।

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