RBI का बड़ा फैसला! Upper Layer NBFC लिस्ट में बरकरार Tata Sons, IPO पर अभी भी संशय

Saroj kanwar
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Tata Sons को एक बार फिर Upper Layer NBFC की सूची में बनाए रखा है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक ने फिलहाल कंपनी को NBFC नियामकीय ढांचे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी है। Tata Sons द्वारा अपनी NBFC-Core Investment Company (CIC) का पंजीकरण रद्द कराने के लिए दिया गया आवेदन अभी भी RBI के पास विचाराधीन है।

RBI ने अपने ताजा नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया कि Tata Sons का Upper Layer NBFC सूची में बने रहना केवल अंतरिम व्यवस्था है और इसका कंपनी की डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी पर होने वाले अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है। जब तक आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं लिया जाता, तब तक कंपनी पर मौजूदा नियामकीय प्रावधान लागू रहेंगे।

RBI ने क्या स्पष्ट किया?

केंद्रीय बैंक के अनुसार, Tata Sons की डी-रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसी कारण कंपनी को फिलहाल Upper Layer NBFC की सूची से हटाया नहीं गया है। RBI ने यह भी कहा कि सूची में बने रहने का मतलब यह नहीं है कि आवेदन खारिज या मंजूर हो चुका है। अंतिम निर्णय आने तक कंपनी को वर्तमान नियमों का पालन करना होगा।

क्या होता है Upper Layer NBFC?

RBI ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए चार स्तरों वाला नियामकीय ढांचा तैयार किया है। इनमें Upper Layer NBFC वे संस्थान होते हैं जो आकार और वित्तीय प्रणाली पर प्रभाव के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ऐसी कंपनियों पर सामान्य NBFC की तुलना में अधिक सख्त नियम लागू होते हैं। इनमें पूंजी पर्याप्तता, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और नियामकीय अनुपालन से जुड़े अतिरिक्त मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है।

पांच साल तक लागू रहते हैं कड़े नियम

RBI ने दोहराया है कि यदि कोई NBFC एक बार Upper Layer श्रेणी में शामिल हो जाती है, तो उस पर कम से कम पांच वर्षों तक कड़े नियामकीय नियम लागू रहते हैं। भले ही बाद में वह निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा न करे। यही कारण है कि कुछ कंपनियां इस वर्ष मानदंडों पर खरी न उतरने के बावजूद सूची में बनी हुई हैं।

Upper Layer NBFC सूची में शामिल प्रमुख कंपनियां

RBI की ताजा सूची में कुल 17 कंपनियों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख नाम हैं—

  • Tata Sons
  • REC
  • Power Finance Corporation (PFC)
  • Indian Railway Finance Corporation (IRFC)
  • PNB Housing Finance
  • Sammaan Capital

Tata Sons लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है?

Tata Sons, Tata Group की होल्डिंग कंपनी है और यह Core Investment Company (CIC) के रूप में पंजीकृत है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की कुल परिसंपत्तियां लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये थीं, जो RBI द्वारा निर्धारित सीमा से कहीं अधिक हैं।

Upper Layer NBFC में शामिल कंपनियों को आमतौर पर तीन वर्षों के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध (IPO/Listing) होना पड़ता है। इसी अनिवार्यता से बचने के लिए Tata Sons ने अपना CIC लाइसेंस रद्द कराने के उद्देश्य से RBI के पास आवेदन किया है।

गौरतलब है कि Tata Sons को वर्ष 2022 में Upper Layer NBFC सूची में शामिल किया गया था। नियमानुसार कंपनी की लिस्टिंग 2025 तक अपेक्षित मानी जा रही थी, लेकिन अब उसका भविष्य RBI के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

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