Oil Companies Profit: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने जहां दुनियाभर में अनिश्चितता और आर्थिक दबाव बढ़ाया, वहीं वैश्विक तेल कंपनियों के लिए यह दौर रिकॉर्ड कमाई लेकर आया। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की आठ सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने अप्रैल से जून के बीच सिर्फ तीन महीनों में करीब ₹8.18 लाख करोड़ का संयुक्त मुनाफा कमाया। यानी इन कंपनियों की औसत कमाई करीब ₹8,800 करोड़ प्रतिदिन रही। इसी भारी मुनाफे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेल कंपनियां “बहुत ज्यादा कमाई कर रही हैं।”
युद्ध के तनाव से बढ़ीं तेल की कीमतें
द गार्जियन द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों को आशंका थी कि यदि तनाव और बढ़ा तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
इसी डर के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। संघर्ष के सबसे संवेदनशील दौर में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि जून के आखिर तक सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- अप्रैल 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 117.29 डॉलर प्रति बैरल रहा।
- मई में यह घटकर 107.14 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
- जून में औसत कीमत 85.40 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।
किस तेल कंपनी ने कितना कमाया?
तेल की ऊंची कीमतों का सबसे बड़ा फायदा सऊदी अरब की सरकारी कंपनी अरामको को मिला। कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में करीब 33 अरब डॉलर (लगभग ₹2.90 लाख करोड़) का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया।
अन्य प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन भी शानदार रहा:
- एक्सॉनमोबिल: करीब ₹1.28 लाख करोड़ का मुनाफा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से लगभग दोगुना है और 2022 के बाद सबसे बड़ा तिमाही लाभ माना जा रहा है।
- शेवरॉन: लगभग ₹1.07 लाख करोड़ का शुद्ध लाभ।
- शेल: करीब 9.84 अरब डॉलर (लगभग ₹86,600 करोड़) का मुनाफा।
- टोटलएनर्जीज: लगभग ₹53,100 करोड़ की कमाई।
- बीपी: करीब ₹50,400 करोड़ का शुद्ध लाभ।
- इक्विनोर: लगभग ₹28,200 करोड़ का मुनाफा।
- एनी (Eni): करीब ₹19,000 करोड़ का शुद्ध लाभ।
इन सभी कंपनियों के मुनाफे में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमतें रहीं।
API ने मुनाफे को बताया निवेश के लिए जरूरी
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के अध्यक्ष माइक समर्स ने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में कहा कि तेल कंपनियां कीमतें तय नहीं करतीं, बल्कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार कारोबार करती हैं। उनके मुताबिक, भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनियों के पास मजबूत मुनाफा होना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता ने ईंधन की कीमतों पर दबाव बनाए रखा। साथ ही उनका मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की कुछ नीतियों ने भी तेल उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया।
रिकॉर्ड कमाई पर बढ़ी बहस
तेल कंपनियों के इस रिकॉर्ड मुनाफे के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या युद्ध, वैश्विक संकट या भू-राजनीतिक तनाव जैसी असाधारण परिस्थितियों में ऊर्जा कंपनियों की भारी कमाई पर अतिरिक्त निगरानी या नियामकीय नियंत्रण होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर आने वाले समय में कई देशों में नीति स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है।