Gold Price Forecast: जल्द गिर सकते हैं सोने के दाम, लेकिन 15 महीने में बना सकता है नया रिकॉर्ड

Saroj kanwar
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सोने की कीमतों में आने वाले महीनों में कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। ब्रोकरेज कंपनी Motilal Oswal Financial Services Limited (MOFSL) ने अपनी ‘H1 2026 Precious Metals Outlook’ रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि निकट भविष्य में सोने के भाव में करीब 6 से 8 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट अस्थायी होगी और इसके बाद सोने की कीमतों में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि अगले 12 से 15 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 5,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को एक साथ बड़ी खरीदारी करने के बजाय धीरे-धीरे किस्तों में निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का अगला पड़ाव क्या होगा?

MOFSL की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में सोना पहले 6-8 फीसदी तक नीचे आ सकता है। इसके बाद इसमें तेजी लौटने की संभावना है और कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस तथा फिर लंबे समय में 5,500 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकती हैं।

भारतीय बाजार की बात करें तो अगर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत करीब 95.5 रुपये प्रति डॉलर के आसपास बनी रहती है, तो सोने में निवेश के लिए 1.30 लाख रुपये से 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर आकर्षक खरीदारी का मौका दे सकता है।

ब्रोकरेज के अनुसार, रिकवरी शुरू होने के बाद सोने का पहला लक्ष्य 1.68 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और इसके बाद करीब 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

2026 में सोने की तेजी के बाद क्यों बढ़ा दबाव?

साल 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों को कई बड़े कारणों से मजबूती मिली थी। वैश्विक व्यापार में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, गोल्ड ईटीएफ में बढ़ता निवेश, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों ने सोने को सपोर्ट दिया था।

लेकिन दूसरी तिमाही में बाजार की परिस्थितियां बदल गईं। अमेरिका से जुड़े व्यापारिक मुद्दों और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी। इसके चलते निवेशकों को संकेत मिला कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं।

इसका असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ा, जो मजबूत हुए। डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग में कुछ कमी आई। वहीं, भू-राजनीतिक तनावों का असर भी अब पहले की तरह तुरंत सोने की कीमतों में तेजी के रूप में नजर नहीं आ रहा है।

निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

रिपोर्ट में बताया गया है कि लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश का आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, मौजूदा बाजार परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य के साथ कदम उठाना चाहिए।

जब तक वास्तविक ब्याज दरों में बड़ी गिरावट नहीं आती, तब तक सोना सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है या इसमें थोड़ी और गिरावट संभव है। ऐसे निवेशक जिनका नजरिया 12 से 15 महीने का है, वे गिरावट के दौरान धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार सोने की खरीदारी और कई विकसित देशों की कमजोर होती वित्तीय स्थिति आने वाले समय में सोने की कीमतों को मजबूती दे सकती है।

चांदी में निवेश करने वालों के लिए क्या संकेत?

चांदी को लेकर भी रिपोर्ट में निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सोने की तुलना में चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिलता है, क्योंकि यह केवल कीमती धातु ही नहीं बल्कि औद्योगिक उपयोग से भी जुड़ी हुई है।

बढ़ते इलेक्ट्रिफिकेशन, सोलर एनर्जी और औद्योगिक मांग के कारण चांदी की कीमतों को लंबी अवधि में सपोर्ट मिल सकता है, लेकिन निवेशकों को इसकी अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लेना चाहिए।

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