एक समय था जब भारतीय कार बाजार में डीजल वाहनों का दबदबा देखने को मिलता था। करीब एक दशक पहले नई कारों की कुल बिक्री में लगभग आधी हिस्सेदारी डीजल मॉडल्स की होती थी। लेकिन समय के साथ ग्राहकों की पसंद तेजी से बदली है। पेट्रोल, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण डीजल कारों की मांग लगातार घट रही है। अब प्रस्तावित BS7 (भारत स्टेज-7) उत्सर्जन मानकों को इस बदलाव का अगला बड़ा कारण माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या BS7 लागू होने के बाद डीजल कारें बाजार से गायब हो जाएंगी?
BS7 नियम क्या हैं?
BS7 भारत के अगले चरण के उत्सर्जन मानक होंगे, जिनका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को पहले से भी अधिक कम करना है। फिलहाल सरकार ने BS7 लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। हालांकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले ही वाहन निर्माताओं से भविष्य के इन मानकों के लिए तैयारी शुरू करने की बात कह चुके हैं। ऑटो इंडस्ट्री से जुड़ी कई रिपोर्टों के अनुसार अगले दो से तीन वर्षों में BS7 नियम लागू किए जा सकते हैं।
क्या BS7 आने के बाद डीजल कारों की बिक्री बंद हो जाएगी?
अभी तक सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है कि डीजल कारों की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। हालांकि नए उत्सर्जन मानकों को पूरा करना डीजल इंजन के लिए पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। कंपनियों को इंजन तकनीक में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं, जिनमें उन्नत एग्जॉस्ट सिस्टम, बेहतर फिल्टर, AdBlue तकनीक का अधिक उपयोग और नए एमिशन कंट्रोल सिस्टम शामिल हो सकते हैं।
इन बदलावों से वाहन निर्माण की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर कारों की कीमत पर पड़ सकता है। ऐसे में कई कंपनियां कम बिक्री वाले डीजल मॉडल्स को बंद करने का फैसला भी ले सकती हैं।
किन डीजल कारों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर?
अब तक किसी भी ऑटो कंपनी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि कौन-सी डीजल कारें बंद होंगी। हालांकि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ लोकप्रिय मॉडलों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Toyota Innova Crysta के 2.4-लीटर डीजल इंजन के भविष्य को लेकर चर्चा चल रही है। वहीं Toyota Fortuner के 2.8-लीटर डीजल इंजन पर भी भविष्य में निर्णय लिया जा सकता है। Tata Harrier और Tata Safari में इस्तेमाल होने वाले 2.0-लीटर डीजल इंजन को नए नियमों के अनुसार अपग्रेड करना पड़ सकता है। यही इंजन Jeep Compass, Jeep Meridian और MG Hector में भी इस्तेमाल होता है, इसलिए इन मॉडलों पर भी BS7 का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा Mahindra को अपने लोकप्रिय 2.2-लीटर mHawk डीजल इंजन में भी आवश्यक तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं।
ऑटो कंपनियां किस दिशा में बढ़ रही हैं?
BS7 को ध्यान में रखते हुए अधिकांश वाहन निर्माता अब केवल डीजल इंजन पर निर्भर नहीं रहना चाहते। कंपनियां तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) मॉडल्स पर निवेश बढ़ा रही हैं।
प्लग-इन हाइब्रिड कारों में बैटरी और पेट्रोल इंजन दोनों का इस्तेमाल होता है। इससे बेहतर माइलेज मिलता है और बैटरी खत्म होने के बाद भी वाहन पेट्रोल इंजन के जरिए आसानी से चलता रहता है। यही वजह है कि भविष्य में इन्हें डीजल कारों का मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
क्या इस समय डीजल कार खरीदना सही रहेगा?
अगर आपकी ड्राइविंग का अधिकांश हिस्सा हाईवे पर होता है, आप लंबी दूरी तय करते हैं और ज्यादा माइलेज चाहते हैं, तो मौजूदा समय में डीजल कारें अब भी एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं।
वहीं यदि आप अगले 8 से 10 वर्षों तक कार इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं, तो हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी गंभीरता से विचार करना बेहतर रहेगा। आने वाले समय में ऑटो कंपनियों का फोकस धीरे-धीरे डीजल इंजन से हटकर नई और कम प्रदूषण वाली तकनीकों पर बढ़ने की संभावना है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि BS7 नियमों की आधिकारिक लॉन्च तारीख और अंतिम दिशा-निर्देश अभी घोषित नहीं किए गए हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि BS7 लागू होते ही भारत में डीजल कारों की बिक्री पूरी तरह बंद हो जाएगी।