नई दिल्ली: प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने से जुड़े इनकम टैक्स के नियम कई लोगों के लिए अब भी काफी जटिल हैं। खासकर पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) की बिक्री के मामले में अक्सर लोग सही टैक्स नियमों से अनजान रहते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक मामले ने इस विषय को फिर चर्चा में ला दिया।
एक यूजर ने बताया कि उनकी मां ने अपनी पैतृक संपत्ति बेचकर बिल्डर से 50 लाख रुपये नकद (Cash) में ले लिए। उस समय उन्हें इनकम टैक्स के नियमों की जानकारी नहीं थी। बाद में जब आयकर रिटर्न (ITR) भरने का समय आया, तब उन्होंने अपने टैक्स सलाहकार से संपर्क किया और उन्हें इस लेनदेन से जुड़े टैक्स नियमों की पूरी जानकारी मिली।
ITR में पैतृक संपत्ति की बिक्री कैसे दिखाएं?
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, पैतृक संपत्ति बेचने से मिलने वाली राशि को सामान्य आय (Income) नहीं माना जाता। इसे कैपिटल गेन (Capital Gain) के रूप में आयकर रिटर्न में दर्ज करना होता है।
यदि किसी वित्तीय वर्ष में आपकी आय केवल संपत्ति बेचने से हुए कैपिटल गेन तक सीमित है और अन्य कोई आय नहीं है, तो आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना उपयुक्त माना जाता है।
पैतृक संपत्ति पर कैपिटल गेन टैक्स कैसे तय होता है?
पैतृक संपत्ति बेचने पर टैक्स सीधे पूरी बिक्री राशि पर नहीं लगाया जाता। सबसे पहले संपत्ति की मूल लागत (Cost of Acquisition) और उससे जुड़े अन्य पात्र खर्चों को ध्यान में रखा जाता है। यदि संपत्ति पहले किसी अन्य पारिवारिक सदस्य के नाम थी, तो उसकी खरीद लागत और स्वामित्व अवधि भी टैक्स गणना में शामिल की जाती है।
इसके बाद बिक्री मूल्य में से निर्धारित लागत और अनुमन्य खर्च घटाकर वास्तविक कैपिटल गेन निकाला जाता है। इसी लाभ पर टैक्स देय होता है।
लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कैसे तय होगा?
पैतृक संपत्ति के मामले में पूर्व मालिक के स्वामित्व की अवधि भी वर्तमान मालिक की होल्डिंग अवधि में जोड़ दी जाती है। इसी आधार पर यह तय होता है कि लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) होगा या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)।
अधिकांश मामलों में पैतृक संपत्ति की बिक्री लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की श्रेणी में आती है।
20% या 12.5% टैक्स, कौन-सा नियम लागू होगा?
यदि संबंधित संपत्ति 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई थी, तो उस पर पुराने नियम लागू हो सकते हैं, जिनमें 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के साथ इंडेक्सेशन (महंगाई के अनुसार लागत समायोजन) का लाभ उपलब्ध था।
वहीं, 23 जुलाई 2024 के बाद लागू नए नियमों के तहत पात्र मामलों में 12.5% टैक्स लगाया जाता है और इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता।
क्या प्रॉपर्टी की बिक्री का पैसा कैश में लिया जा सकता है?
इनकम टैक्स कानून के तहत संपत्ति के लेनदेन में बड़ी रकम नकद लेना या देना जोखिम भरा हो सकता है। नियमों के अनुसार, 20,000 रुपये से अधिक का नकद लेनदेन कई परिस्थितियों में आयकर विभाग की जांच का कारण बन सकता है।
यदि बड़ी राशि नकद में ली जाती है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को लेनदेन का उचित रिकॉर्ड, वैध दस्तावेज और टैक्स नियमों के अनुसार रिटर्न दाखिल करना जरूरी होता है। सही तरीके से आय घोषित करने और लागू टैक्स का भुगतान करने पर अनावश्यक विवाद से बचा जा सकता है।
ध्यान रखने वाली बातें
- पैतृक संपत्ति बेचने से होने वाली आय को कैपिटल गेन के रूप में दिखाएं।
- केवल कैपिटल गेन की आय होने पर सामान्यतः ITR-2 फॉर्म उपयुक्त होता है।
- टैक्स की गणना में मूल खरीद लागत, पूर्व मालिक की होल्डिंग अवधि और अन्य पात्र खर्च शामिल किए जाते हैं।
- संपत्ति की खरीद की तारीख के आधार पर 20% या 12.5% वाले नियम लागू हो सकते हैं।
- बड़ी रकम नकद में लेने या देने से पहले आयकर नियमों की जानकारी लेना और टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।