Gold Price Today: बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों पर होने वाली अहम बैठक मानी जा रही है। निवेशकों की नजर अब फेड के फैसले पर टिकी है, क्योंकि इससे आने वाले समय में सोने की कीमतों और महंगाई की दिशा तय होने की उम्मीद है।
सोने की कीमतों में मामूली गिरावट
बुधवार के कारोबार में स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 0.1 प्रतिशत फिसलकर 4,021.87 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में लगभग 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 4,021.70 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक बड़े निवेश से बच रहे हैं और फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी बाजार की नजर
फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक बुधवार को समाप्त होने वाली है। बाजार को फिलहाल उम्मीद है कि इस बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, फेडवॉच टूल के अनुसार करीब 70 प्रतिशत संभावना है कि दरें मौजूदा स्तर पर बनी रहेंगी, जबकि लगभग 30 प्रतिशत संभावना 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना और अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।
ऊंची ब्याज दरों का सोने पर क्या असर पड़ता है?
यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है। इसकी वजह यह है कि ऐसी स्थिति में बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प निवेशकों को अधिक आकर्षित करते हैं, जिससे सोने जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश की मांग घट सकती है।
डॉलर मजबूत होने से क्यों गिरती हैं सोने की कीमतें?
इस समय अमेरिकी डॉलर लगभग एक महीने के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों की मुद्रा रखने वाले निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। यही कारण है कि डॉलर की मजबूती अक्सर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बनाती है।
पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी बनी हुई है नजर
सोने की चाल पर केवल फेड का फैसला ही असर नहीं डाल रहा है, बल्कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले की कोशिश को विफल कर दिया। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी लगातार गतिविधियां तेज हैं। ओमान ने खाड़ी देशों के सहयोग से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के संचालन को लेकर एक प्रस्ताव ईरान को सौंपा है, जबकि अमेरिका ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने के विचार को स्वीकार नहीं किया है।
आगे क्या रह सकता है सोने का रुख?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी—फेडरल रिजर्व का ब्याज दर फैसला, अमेरिकी डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति। यदि फेड की ओर से भविष्य की ब्याज दरों को लेकर कोई बड़ा संकेत मिलता है, तो सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।