भारतीय रेलवे लगातार बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है। खासतौर पर जनरल और स्लीपर श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों में अतिरिक्त नॉन-एसी कोच जोड़ने का अभियान तेज कर दिया है। इसके साथ ही सुरक्षा, डिजिटल टिकटिंग, भर्ती और रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
यात्रियों की भीड़ को देखते हुए बढ़ाए गए जनरल कोच
रेलवे के अनुसार, पूरे साल ट्रेनों में यात्रियों की संख्या समान नहीं रहती। गर्मी की छुट्टियों, त्योहारों और विशेष अवसरों पर लोकप्रिय रूटों की ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले दो वर्षों में कई लंबी दूरी की ट्रेनों में स्थायी रूप से अतिरिक्त जनरल कोच लगाए गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 1,250 नए जनरल कोच विभिन्न ट्रेनों में जोड़े गए, जिससे अधिकांश लंबी दूरी की ट्रेनों में कम से कम चार जनरल कोच उपलब्ध हो सकें। वहीं 2025-26 में कुल 870 अतिरिक्त कोच शामिल किए गए, जिनमें 160 जनरल कोच थे। इसके अलावा 2026-27 में 30 जून तक 190 और कोच जोड़े जा चुके हैं, जिनमें 20 जनरल कोच शामिल हैं।
रेलवे का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आम यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध कराना और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
रेलवे के 70% कोच नॉन-एसी
वर्तमान में भारतीय रेलवे के लगभग 89 हजार कोचों में करीब 70 प्रतिशत नॉन-एसी और 30 प्रतिशत एसी कोच हैं। रेलवे की मौजूदा कोचिंग नीति के अनुसार 22 डिब्बों वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में 12 जनरल एवं नॉन-एसी स्लीपर कोच तथा 8 एसी कोच रखे जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को किफायती यात्रा का विकल्प मिल सके।
इसके अलावा बिना आरक्षण यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए पैसेंजर, मेमू (MEMU) और ईएमयू (EMU) सेवाओं का भी संचालन लगातार किया जा रहा है।
अमृत भारत ट्रेन में मिल रही आधुनिक सुविधाएं
कम और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई अमृत भारत ट्रेन पूरी तरह नॉन-एसी श्रेणी की है। इसकी एक रेक में 11 जनरल कोच, 8 स्लीपर कोच, एक पैंट्री कार और दो लगेज-कम-दिव्यांग कोच शामिल किए गए हैं।
रेलवे का दावा है कि इन ट्रेनों में यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनका स्तर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के अनुरूप रखा गया है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग में बढ़ी डिजिटल भागीदारी
रेलवे डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऑनलाइन टिकट बुकिंग में फर्जी गतिविधियों पर भी सख्ती बरत रहा है। रेलवे का रेल वन (RailOne) ऐप अब तक 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसके जरिए प्रतिदिन औसतन 9.65 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं।
जून 2025 से जून 2026 के बीच रेलवे ने कुल 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट जारी किए। इनमें लगभग 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन माध्यम से जबकि 11 प्रतिशत टिकट रेलवे काउंटरों से बुक किए गए।
कवच सुरक्षा प्रणाली का तेजी से विस्तार
रेलवे सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी कवच 4.0 तकनीक का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। यह आधुनिक सुरक्षा प्रणाली दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल मार्गों के 2,490 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।
इसके अलावा लगभग 21,937 रूट किलोमीटर पर कवच सिस्टम लगाने का कार्य जारी है। साथ ही 7,435 लोकोमोटिव और करीब 1,200 ईएमयू एवं मेमू ट्रेनों में भी इस तकनीक को स्थापित किया जा रहा है।
रेलवे में भर्ती प्रक्रिया भी जारी
रेलवे के अनुसार, वर्ष 2014 से जून 2026 तक 5.56 लाख से अधिक नियुक्तियां पूरी की जा चुकी हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए वार्षिक भर्ती कैलेंडर के तहत प्रक्रिया लगातार जारी है। 2024, 2025 और 2026 के भर्ती कार्यक्रमों के माध्यम से 1.61 लाख से अधिक पदों पर भर्ती की जा रही है।
ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग पूरा हुआ विद्युतीकरण
भारतीय रेलवे ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क के 99.6 प्रतिशत हिस्से का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ भारत रेलवे विद्युतीकरण के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि स्विट्जरलैंड पहले स्थान पर बना हुआ है।
डीजल की खपत में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में जहां रेलवे लगभग 293 करोड़ लीटर डीजल का उपयोग करता था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 108 करोड़ लीटर रह गया है।
हरित ऊर्जा पर बढ़ता रेलवे का फोकस
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेलवे ने 1,260 मेगावाट से अधिक सौर एवं पवन ऊर्जा क्षमता विकसित कर ली है। रेलवे का लक्ष्य भविष्य में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ संचालन लागत कम करना और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाना है।