नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब दो महीने बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। गुरुवार को इसकी कीमत लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, जबकि सप्ताह के अंत में यह 100.69 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। दूसरी ओर, WTI Crude की कीमत करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
कमोडिटी और करेंसी मार्केट के जानकार अनिंद्य बनर्जी (Kotak Securities) का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा उछाल के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं।
- यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना के बाद ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ी।
- कजाकिस्तान ने ड्रोन हमलों के बाद कैस्पियन पाइपलाइन के जरिए होने वाले तेल निर्यात को रोक दिया, जिससे सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।
इन घटनाओं के कारण वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता गहराई है और इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
तीन अहम रास्तों पर टिका है वैश्विक ऑयल मार्केट
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण समुद्री और निर्यात मार्गों पर निर्भर करता है।
1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)
यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां पहले से तनाव की स्थिति बनी हुई है और यही कारण है कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया है।
2. बाब-अल-मंदेब (Bab el-Mandeb)
लाल सागर का यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यहां जहाजों पर हमले बढ़ते हैं या रास्ता बाधित होता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
3. फुजैरा टर्मिनल (Fujairah Terminal)
यह टर्मिनल होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प माना जाता है। यदि यहां भी किसी तरह का संकट पैदा होता है, तो वैश्विक तेल बाजार को बड़ा झटका लग सकता है।
कीमतें और क्यों बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कई महीनों से दुनिया भर में कच्चे तेल का भंडार लगातार घट रहा है। ऐसे में यदि सप्लाई में थोड़ी भी अतिरिक्त रुकावट आती है, तो बाजार के पास पर्याप्त बैकअप स्टॉक नहीं होगा। यही कारण है कि छोटी सी सप्लाई समस्या भी कीमतों में बड़ी तेजी ला सकती है।
क्या भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे होंगे?
भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे किन स्तरों पर रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इन अहम स्तरों पर रहेगी।
- 90 डॉलर प्रति बैरल ब्रेंट क्रूड के लिए मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।
- 92 से 95 डॉलर का दायरा भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
- यदि ब्रेंट की कीमत 90 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो तेजी का रुझान जारी रह सकता है।
सोना और चांदी पर क्या पड़ेगा असर?
महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। इसके चलते वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
- सोना: विशेषज्ञों के अनुसार 3,950 से 4,000 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। इसके ऊपर कीमतें 3,950 से 4,150 डॉलर के दायरे में रह सकती हैं।
- चांदी: चांदी के लिए 56 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट और 60 से 61 डॉलर के बीच रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई से जुड़ी चिंताओं ने कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है। फिलहाल ईंधन की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।