पुराना स्मार्टफोन फेंकने से पहले रुकिए! Google अब इन्हीं पुराने फोन को खरीदने की तैयारी में

Saroj kanwar
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क्या आपके घर में कोई पुराना स्मार्टफोन धूल खा रहा है? अगर आप उसे बेकार समझकर एक तरफ रख चुके हैं, तो अब उसे फेंकने की जल्दबाजी न करें। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google ऐसे पुराने स्मार्टफोन्स को एक नई भूमिका देने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य इन डिवाइसेज को दोबारा बेचने का नहीं, बल्कि उन्हें मिनी डेटा सेंटर में बदलने का है।

Google का यह नया रिसर्च प्रोजेक्ट टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ रहे कार्बन उत्सर्जन और ई-कचरे की समस्या को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर यह अनोखी तकनीक क्या है और कैसे आपके पुराने फोन की उपयोगिता फिर से बढ़ सकती है।

पुराने स्मार्टफोन से बनेगा लो-कार्बन कंप्यूटिंग सिस्टम

Google और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के शोधकर्ता मिलकर एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें रिटायर हो चुके स्मार्टफोन्स को लो-कार्बन कंप्यूटिंग क्लस्टर्स में बदला जाएगा।

इस पहल का मकसद उन स्मार्टफोन्स के प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज जैसे महत्वपूर्ण हार्डवेयर का दोबारा उपयोग करना है, जो आमतौर पर नए फोन खरीदने के बाद बेकार पड़े रह जाते हैं।

क्या है Phone Cluster Computing?

इस तकनीक को “फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग” कहा जा रहा है। Google के अनुसार, सबसे पहले पुराने स्मार्टफोन से डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा और बाहरी बॉडी को अलग कर दिया जाएगा।

इसके बाद केवल मदरबोर्ड को सुरक्षित रखा जाएगा, क्योंकि उसी में फोन की असली कंप्यूटिंग क्षमता मौजूद होती है। इन मदरबोर्ड्स को एक-दूसरे से जोड़कर उन पर Linux ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल किया जाएगा।

इसके बाद Kubernetes जैसे एडवांस मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म की मदद से हजारों डिवाइसेज को एक साथ नियंत्रित किया जाएगा। यही तकनीक आज बड़े क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर में भी इस्तेमाल की जाती है।

Google का दावा है कि लगभग 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन्स को जोड़कर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जिसकी कंप्यूटिंग क्षमता एक आधुनिक सर्वर के बराबर हो सकती है।

Google इस प्रोजेक्ट पर इतना जोर क्यों दे रहा है?

टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में कार्बन फुटप्रिंट बढ़ने की दो बड़ी वजहें हैं। पहली, सर्वर और डेटा सेंटर को चलाने में खर्च होने वाली बिजली, और दूसरी, नए हार्डवेयर एवं चिप्स के निर्माण के दौरान होने वाला प्रदूषण।

आज अधिकांश लोग हर कुछ वर्षों में अपना स्मार्टफोन बदल देते हैं, जबकि पुराने फोन के प्रोसेसर और मेमोरी अभी भी काफी सक्षम होते हैं। Google का मानना है कि इन पार्ट्स का पुनः उपयोग करके ई-वेस्ट को कम किया जा सकता है और नए सर्वर बनाने की आवश्यकता भी घटाई जा सकती है।

2,000 पुराने Pixel फोन से बनेगा बड़ा क्लस्टर

रिसर्च के शुरुआती चरण में Google करीब 2,000 पुराने Pixel स्मार्टफोन्स को जोड़कर एक विशाल कंप्यूटिंग क्लस्टर तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है।

इस सिस्टम का उपयोग मुख्य रूप से विश्वविद्यालयों में कंप्यूटर साइंस के छात्रों को प्रोग्रामिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और सिस्टम डेवलपमेंट जैसी तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए किया जाएगा।

क्या यह Gemini जैसे AI मॉडल को ट्रेन करेगा?

नहीं। यह समझना जरूरी है कि पुराने स्मार्टफोन्स से बने ये क्लस्टर्स Google के बड़े AI मॉडल या हाई-एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को ट्रेन नहीं कर पाएंगे।

Gemini जैसे एडवांस AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए अभी भी Nvidia के अत्याधुनिक AI चिप्स और हाई-परफॉर्मेंस सर्वर्स की आवश्यकता होती है।

हालांकि, इन स्मार्टफोन-आधारित मिनी डेटा सेंटर्स का उपयोग वेबसाइट होस्टिंग, शैक्षणिक शोध, क्लाउड डेवलपमेंट टूल्स, ऑनलाइन यूनिवर्सिटी सिस्टम और अन्य हल्के कंप्यूटिंग कार्यों के लिए किया जा सकता है।

निष्कर्ष

Google का यह प्रयोग दिखाता है कि भविष्य में पुरानी तकनीक को फेंकने के बजाय उसे नए रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो न केवल ई-कचरे में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण पर डेटा सेंटरों के बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकेगा। आने वाले वर्षों में पुराने स्मार्टफोन एक नई डिजिटल क्रांति की नींव बन सकते हैं।

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