चालान के नियम बदल गए, अब 50 फीसदी वाला नया रूल आया

Saroj kanwar
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अगर आपकी गाड़ी का चालान कटा हुआ है और आप उसे लोक अदालत में जाकर कम या खत्म कराने की सोच रहे हैं, तो नियमों में हुए नए बदलाव आपके लिए जरूरी हैं। अब प्रक्रिया पहले जैसी आसान नहीं रही, क्योंकि सरकार ने चालान निपटाने के नियमों को सख्त कर दिया है।


लोक अदालत में जाने से पहले 50% जुर्माना अनिवार्य

नए ट्रैफिक नियमों के अनुसार अब किसी भी चालान को लोक अदालत में ले जाने से पहले उसका कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करना जरूरी होगा। यानी यदि आप जुर्माना कम करवाना चाहते हैं या केस निपटाना चाहते हैं, तो पहले आधी राशि राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करनी होगी।

इसके बिना आपका मामला लोक अदालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।


45 दिन के भीतर कार्रवाई जरूरी

चालान कटने के बाद वाहन मालिक को 45 दिनों के भीतर या तो पूरा जुर्माना भरना होगा या फिर ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी आपत्ति दर्ज करनी होगी। इसके बाद ही लोक अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

इसका उद्देश्य ट्रैफिक नियमों के मामलों को समय पर निपटाना और लंबित चालानों को कम करना है।


एक साल में 5 चालान तो लाइसेंस रद्द

ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले नियम के तहत, यदि किसी व्यक्ति को एक साल के अंदर 5 या उससे अधिक चालान मिलते हैं, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस स्वतः रद्द किया जा सकता है।

इसके अलावा, जिन वाहनों के चालान लंबे समय से बकाया हैं, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। ऐसे वाहनों के लिए परिवहन विभाग की वेबसाइट पर कई सेवाएं बंद हो जाएंगी, जैसे—

  • वाहन ट्रांसफर
  • टैक्स भुगतान से जुड़ी सेवाएं
  • परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट
  • हाइपोथेकेशन कैंसिलेशन
  • वाहन श्रेणी में बदलाव जैसी सुविधाएं

ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता में संभावित बदलाव

वर्तमान में ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता 20 साल या 40 वर्ष की उम्र तक सीमित होती है। लेकिन नए प्रस्तावों के अनुसार इसे बढ़ाकर 50 वर्ष तक किया जा सकता है।

अगर यह बदलाव लागू होता है, तो ड्राइवरों को बार-बार RTO के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो जाएगी। साथ ही वाहन ट्रांसफर और परमिट रिन्यूअल जैसी प्रक्रियाओं को भी अधिक सरल और डिजिटल बनाने पर विचार किया जा रहा है।


निष्कर्ष

ट्रैफिक नियमों में हो रहे ये बदलाव सीधे तौर पर वाहन चालकों को प्रभावित करेंगे। जहां एक ओर लोक अदालत की प्रक्रिया सख्त हुई है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल सिस्टम और लंबी वैधता जैसे कदम राहत भी दे सकते हैं।

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