कमजोर मानसून की आशंका के बीच जहां केंद्र सरकार किसानों को कम पानी वाली फसलों जैसे मूंगफली की खेती अपनाने की सलाह दे रही है, वहीं शहरी बुनियादी ढांचे को लेकर भी बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी चल रही है। खासकर दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है।
सरकार ने राजधानी दिल्ली के प्रमुख नेशनल हाईवे कॉरिडोर्स को पूरी तरह सिग्नल-फ्री बनाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
तीन प्रमुख कॉरिडोर होंगे सिग्नल-फ्री
इस योजना के तहत दिल्ली के सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले तीन प्रमुख मार्गों को बिना ट्रैफिक सिग्नल के संचालित करने की दिशा में काम किया जाएगा:
1. आश्रम से बदरपुर कॉरिडोर
यह रूट दक्षिण दिल्ली को फरीदाबाद से जोड़ता है। इसके सिग्नल-फ्री होने से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
2. महिपालपुर–मेहरौली से गुरुग्राम कॉरिडोर
दिल्ली और गुरुग्राम के बीच सफर करने वाले हजारों ऑफिस जाने वालों के लिए यह रूट बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर ट्रैफिक बाधाएं कम होने से यात्रा समय में भारी कमी आएगी।
3. पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर कॉरिडोर
पश्चिम दिल्ली से हरियाणा के बहादुरगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों को इस प्रोजेक्ट से तेज और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।
बड़े स्तर पर फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण
इन कॉरिडोर को पूरी तरह निर्बाध बनाने के लिए कई स्थानों पर फ्लाईओवर, अंडरपास और ग्रेड सेपरेटर बनाए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहनों को किसी भी चौराहे या सिग्नल पर रुकना न पड़े और ट्रैफिक लगातार आगे बढ़ता रहे।
कालिंदी कुंज बनेगा नया आधुनिक इंटरचेंज
इस योजना का सबसे अहम हिस्सा कालिंदी कुंज जंक्शन का पुनर्विकास है। वर्तमान में यह इलाका दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद को जोड़ने वाला सबसे व्यस्त और जाम वाला पॉइंट माना जाता है।
सरकार यहां एक आधुनिक और विशाल इंटरचेंज विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके बनने के बाद तीनों शहरों के बीच आवाजाही पहले से कहीं अधिक तेज और सुचारू हो जाएगी।
समय और ईंधन दोनों की बड़ी बचत
यह पूरा प्रोजेक्ट दिल्ली को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स ने भी यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद की है।
नई योजना लागू होने के बाद न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि हर साल करोड़ों लीटर ईंधन की भी बचत होगी। यात्रियों को लंबे जाम और तनाव से राहत मिलेगी और कई घंटे का सफर मिनटों में पूरा हो सकेगा।