आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात तक हम लगभग हर काम के लिए फोन पर निर्भर रहते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या मोबाइल फोन की रेडिएशन से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है?
इस विषय पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर भारद्वाज की राय और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं।
क्या मोबाइल फोन से ब्रेन ट्यूमर होता है? (सच्चाई)
अब तक की मेडिकल रिसर्च के अनुसार ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, जो यह साबित करे कि मोबाइल फोन, वाई-फाई या ज्यादा स्क्रीन टाइम सीधे तौर पर ब्रेन ट्यूमर का कारण बनते हैं।
लंबे समय से इस विषय पर अध्ययन चल रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर किसी भी बड़ी रिसर्च में मोबाइल फोन को ब्रेन कैंसर या ब्रेन ट्यूमर का सीधा कारण नहीं पाया गया है। इसलिए इसे फिलहाल एक मिथक माना जाता है।
मोबाइल रेडिएशन को लेकर क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
यह सच है कि मोबाइल फोन से बहुत कम स्तर की रेडिएशन निकलती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ प्रकार की उच्च-ऊर्जा रेडिएशन कोशिकाओं के डीएनए को प्रभावित कर सकती है और कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती है।
लेकिन मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन इतनी कम होती है कि अब तक यह साबित नहीं हुआ कि यह दिमाग में ट्यूमर पैदा करती है।
ब्रेन ट्यूमर क्या होता है?
ब्रेन ट्यूमर दिमाग में बनने वाली असामान्य कोशिकाओं की गांठ होती है। जब कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो यह ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
यह ट्यूमर दिमाग के किसी भी हिस्से में बन सकता है और उसकी स्थिति के अनुसार शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के प्रकार
ब्रेन ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
1. बिनाइन (Benign) ट्यूमर
- यह धीरे-धीरे बढ़ता है
- शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलता
- लेकिन बड़ा होने पर दिमाग पर दबाव डाल सकता है
2. मेलिगनेंट (Malignant) ट्यूमर
- यह कैंसरस होता है
- तेजी से फैल सकता है
- आसपास के टिश्यू को नुकसान पहुंचाता है
- अधिक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ बढ़ सकते हैं:
- लगातार सिर दर्द
- उल्टी या जी मिचलाना
- धुंधला या दोहरा दिखना
- चक्कर आना
- हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
- बोलने में परेशानी
- याददाश्त कमजोर होना
- दौरे पड़ना
- चलने-फिरने में दिक्कत
ध्यान रहे, केवल सिर दर्द होने का मतलब ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक समस्या रहने पर जांच जरूरी है।
ब्रेन ट्यूमर के कारण
ब्रेन ट्यूमर का कोई एक निश्चित कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। यह मुख्य रूप से कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलावों के कारण विकसित हो सकता है।
कुछ मामलों में अधिक रेडिएशन संपर्क को जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन मोबाइल फोन को इसका कारण साबित नहीं किया गया है।
ब्रेन ट्यूमर का इलाज
इलाज ट्यूमर के प्रकार, आकार और स्थान पर निर्भर करता है:
- सर्जरी (ट्यूमर हटाने के लिए)
- रेडिएशन थेरेपी
- कीमोथेरेपी
- या इनका संयोजन
अगर ट्यूमर बिनाइन है और सुरक्षित स्थान पर है, तो सर्जरी से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई सीधा संबंध अब तक साबित नहीं हुआ है।
हालांकि ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर बीमारी है, इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार सिर दर्द, चक्कर, दृष्टि संबंधी समस्या या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।