RBI FCNR Deposit Scheme: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए एक अहम कदम उठाते हुए विदेशी मुद्रा जमा खातों (FCNR) से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले के बाद NRI अब भारत में अपनी विदेशी मुद्रा जमा कर 7% तक का आकर्षक ब्याज हासिल कर सकते हैं। वैश्विक स्तर पर डॉलर पर इतनी सुरक्षित और ऊंची रिटर्न मिलना मुश्किल है, इसलिए यह योजना NRI निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर मानी जा रही है।
FCNR (B) अकाउंट क्या होता है?
FCNR (Foreign Currency Non-Resident) एक विशेष बैंक खाता है, जिसे NRI और भारतीय मूल के विदेशी नागरिक (PIO) भारत में खोल सकते हैं। इस खाते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा राशि भारतीय रुपये में नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा जैसे अमेरिकी डॉलर (USD), ब्रिटिश पाउंड (GBP), यूरो या अन्य मान्य विदेशी करेंसी में रखी जाती है।
चूंकि पैसा विदेशी मुद्रा में ही जमा रहता है, इसलिए निवेशकों को रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। मैच्योरिटी पूरी होने पर मूलधन और ब्याज दोनों उसी विदेशी मुद्रा में वापस मिलते हैं। इसके अलावा FCNR खाते से मिलने वाला ब्याज भारत में पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है और राशि को आसानी से विदेश भेजा जा सकता है।
RBI के ताजा फैसले में क्या खास है?
जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI ने घोषणा की कि 30 सितंबर 2026 तक खुलने वाले 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए FCNR जमा खातों के लिए विदेशी मुद्रा हेजिंग की पूरी लागत वहन की जाएगी। इसके साथ ही 17 जून को RBI ने बैंकों द्वारा FCNR जमा पर दिए जाने वाले ब्याज की अधिकतम सीमा भी समाप्त कर दी।
इस फैसले के बाद कई बैंक FCNR जमा पर पहले की तुलना में काफी ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। बड़े निजी बैंक करीब 6% ब्याज दे रहे हैं, जबकि कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक 7% से अधिक रिटर्न की पेशकश कर रहे हैं।
किन बैंकों में मिल रहा है सबसे ज्यादा ब्याज?
वर्तमान में FCNR जमा पर सबसे आकर्षक ब्याज दरें स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे हैं।
- Equitas Small Finance Bank – 7.13%
- Ujjivan Small Finance Bank – 7.13%
- AU Small Finance Bank – 7.00% से 7.10%
- Punjab National Bank – 6.40% से 6.50%
- Axis Bank – 6%
- HDFC Bank – 6%
- ICICI Bank – 6%
- State Bank of India (SBI) – 5.25% से 5.75%
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड जहां लगभग 4% से 4.2% रिटर्न दे रहे हैं, वहीं FCNR जमा पर 6% से 7% तक का ब्याज निवेशकों को अतिरिक्त लाभ प्रदान कर सकता है।
FCNR(B) योजना कैसे काम करती है?
FCNR(B) एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है, जिसमें NRI अपनी पसंद की विदेशी मुद्रा में पैसा जमा करते हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से पांच मुद्राओं में उपलब्ध है:
- अमेरिकी डॉलर (USD)
- ब्रिटिश पाउंड (GBP)
- सिंगापुर डॉलर (SGD)
- कनाडाई डॉलर (CAD)
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD)
NRE FD के विपरीत, इसमें विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में परिवर्तित नहीं किया जाता। पूरी अवधि के दौरान रकम उसी मुद्रा में बनी रहती है और मैच्योरिटी पर भी निवेशक को उसी मुद्रा में भुगतान किया जाता है। इससे विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता।
यह योजना NRI, OCI और PIO श्रेणी के लोगों के लिए उपलब्ध है। वर्तमान विशेष सुविधा 30 सितंबर 2026 तक खोले जाने वाले 3 से 5 वर्ष की अवधि के नए जमा खातों पर लागू रहेगी।
NRE FD और FCNR में क्या अंतर है?
NRE FD और FCNR दोनों ही टैक्स-फ्री और पूरी तरह रिपैट्रिएबल (विदेश भेजने योग्य) हैं। लेकिन सबसे बड़ा अंतर मुद्रा का है।
NRE FD
- भारतीय रुपये में जमा होती है।
- रुपये की कमजोरी या गिरावट का असर रिटर्न पर पड़ सकता है।
- रुपये के अवमूल्यन से डॉलर में वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है।
FCNR FD
- विदेशी मुद्रा में जमा रहती है।
- करेंसी एक्सचेंज का कोई जोखिम नहीं।
- मूलधन और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में वापस मिलते हैं।
- डॉलर निवेशकों के लिए बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कई दशकों में भारतीय रुपया औसतन हर साल डॉलर के मुकाबले 4% से 4.5% कमजोर हुआ है। ऐसे में NRE FD पर मिलने वाला ऊंचा ब्याज भी डॉलर के हिसाब से काफी कम हो सकता है। FCNR इस जोखिम को पूरी तरह खत्म कर देता है।
क्या मौजूदा NRE FD को तोड़कर FCNR में निवेश करना चाहिए?
विशेषज्ञ फिलहाल मौजूदा NRE FD को समय से पहले तोड़ने की सलाह नहीं देते। समय से पहले FD बंद करने पर पेनल्टी लग सकती है और मुद्रा परिवर्तन के कारण नुकसान भी हो सकता है।
सलाहकारों का मानना है कि नए निवेश के लिए FCNR एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन पुराने निवेश को जारी रखना अधिक समझदारी होगी। निवेशक अपनी नई डॉलर बचत को FCNR, अमेरिकी ट्रेजरी बिल, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट या अन्य विदेशी निवेश विकल्पों में लगा सकते हैं।
निष्कर्ष
RBI का यह कदम NRI निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है। FCNR जमा पर बढ़ी हुई ब्याज दरें, टैक्स-फ्री आय और करेंसी जोखिम से सुरक्षा इसे विदेशी मुद्रा रखने वाले निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनाती हैं। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षित डॉलर निवेश पर सीमित रिटर्न मिल रहा है, FCNR योजना NRI निवेशकों के लिए बेहतर कमाई का रास्ता खोल सकती है।