सोना-चांदी में भारी गिरावट: 19 दिनों में आसमान से जमीन पर आए दाम, अभी खरीदें या बेचें?

Saroj kanwar
5 Min Read

नई दिल्ली: इस महीने सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग घटने का सीधा असर इन कीमती धातुओं पर पड़ा है। खासतौर पर ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी के बाद निवेशकों ने गोल्ड और सिल्वर से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत से अब तक सोने में लगभग 6.5% और चांदी में करीब 11.56% की गिरावट आ चुकी है।

सोना-चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट आई?

1 जून को MCX पर सोना 1,54,908 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जो 19 जून तक गिरकर लगभग 1,44,938 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इस दौरान सोने की कीमत में करीब 10,070 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी दर्ज की गई।

वहीं, चांदी की बात करें तो 1 जून को इसका भाव 2,63,458 रुपये प्रति किलो था, जो घटकर 2,33,010 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। यानी चांदी में लगभग 30,448 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट देखने को मिली।

आखिर क्यों टूटे सोने और चांदी के दाम?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बढ़ती महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और मजबूत हो रहा अमेरिकी डॉलर शामिल है।

इसके अलावा बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और गोल्ड-सिल्वर ETF से लगातार हो रही निकासी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। इन सभी कारणों ने मिलकर कीमतों पर दबाव बनाया है।

हालांकि जानकार मानते हैं कि लंबी अवधि में सोने और चांदी की मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी और ये अभी भी मजबूत निवेश विकल्प बने रह सकते हैं।

क्या पुराने निवेशकों को घबराना चाहिए?

पिछले डेढ़ साल में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जिससे कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी कर ली। अब गिरावट के चलते ऐसे निवेशक दुविधा में हैं कि उन्हें नुकसान में बेच देना चाहिए या इंतजार करना चाहिए।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में भावनात्मक फैसले लेने से बचना चाहिए। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के निदेशक पुनीत सिंघानिया के अनुसार, बाजार में तेजी के बाद आने वाली गिरावट जरूरी नहीं कि दीर्घकालिक ट्रेंड बदलने का संकेत हो। यदि निवेश लंबे समय के नजरिए से किया गया है तो जल्दबाजी में बाहर निकलना नुकसानदेह हो सकता है।

नए निवेशकों के लिए क्या रणनीति सही रहेगी?

विशेषज्ञ मौजूदा गिरावट को नए निवेशकों के लिए एक अवसर मान रहे हैं, लेकिन एक साथ बड़ी रकम लगाने से सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं।

रिद्धिसिद्धि बुलियंस के एमडी पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, निवेशकों को 6 से 12 महीनों में धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए। गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए SIP जैसे तरीके अपनाना अधिक सुरक्षित माना जा सकता है।

सुझाव दिया जा रहा है कि किसी भी निवेशक को अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल 10% से 15% हिस्सा ही सोने-चांदी में रखना चाहिए।

निवेश का बेहतर तरीका क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय के निवेश के लिए फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की तुलना में डिजिटल विकल्प ज्यादा बेहतर हैं। गोल्ड ETF, सिल्वर ETF और म्यूचुअल फंड जैसे साधनों में स्टोरेज की परेशानी नहीं होती।

इसके अलावा इनमें सुरक्षा, पारदर्शिता और खरीद-बिक्री की सुविधा भी बेहतर मिलती है। वहीं फिजिकल ज्वेलरी आमतौर पर शादी, गिफ्ट या व्यक्तिगत उपयोग के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और अन्य अतिरिक्त लागत जुड़ी होती है।

आगे क्या रह सकता है बाजार का रुख?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और कम होता है, महंगाई नियंत्रण में रहती है और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती शुरू होती है, तो सोने-चांदी की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे समझदारी भरी रणनीति यही मानी जा रही है कि वे घबराकर फैसले न लें और गिरावट के दौर में धीरे-धीरे निवेश

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *