अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित दान गड़बड़ी मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मामले की पड़ताल कर रही विशेष जांच टीम (SIT) जल्द ही कुछ अहम लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है। जांच के केंद्र में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव हैं।
जानकारी के अनुसार, SIT दान की गणना प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने और आगे गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
आरोपों को लेकर परिवार का पलटवार
टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने अपने पति पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें साजिश का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
पूनम यादव ने कहा कि पिछले कई दिनों से उनका परिवार मानसिक दबाव और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहा है। उन्होंने संपत्ति और घर से जुड़े आरोपों को भी गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि उनका मकान वर्ष 2008 में खरीदा गया था और 2015 में उसका निर्माण कराया गया था। उनके अनुसार, यह सब राम मंदिर से जुड़े मौजूदा विवाद से काफी पहले का है।
क्या ट्रस्ट में हो सकते हैं बड़े बदलाव?
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि मामले को लेकर ट्रस्ट के भीतर मंथन जारी है। ऐसी चर्चा है कि चंपत राय समेत कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से अलग होने पर विचार कर सकते हैं। ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव के नाम भी इस चर्चा में शामिल बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा, यदि जांच में किसी पदाधिकारी की लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है, तो उन्हें ट्रस्ट से हटाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
क्या है दान गड़बड़ी का पूरा मामला?
यह विवाद उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के साथ कथित रूप से हेराफेरी की गई। आरोप है कि कुछ कीमती वस्तुओं को नकली सामान से बदल दिया गया, जबकि नकद दान में भी अनियमितताओं और चोरी की आशंका जताई गई है।
जांच एजेंसियां दान से जुड़े रिकॉर्ड, आभूषणों की सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं। देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस मामले ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच जारी, अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और संबंधित एजेंसियों ने अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष या आधिकारिक आरोप तय नहीं किए हैं। ऐसे में जांच पूरी होने तक सभी आरोपों को कथित माना जा रहा है। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।