सोने के गहने बनाने के बाद कारीगर क्यों जलाते हैं अपने कपड़े? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

Saroj kanwar
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सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में सोने के छोटे से छोटे टुकड़े की भी बड़ी कीमत हो गई है। यही वजह है कि ज्वेलरी बनाने वाले कारीगर सोने का एक-एक कण बचाने के लिए खास तरीके अपनाते हैं। आपने शायद सुना होगा कि कई सुनार काम खत्म होने के बाद अपने कपड़े तक जला देते हैं। इसके पीछे की वजह बेहद दिलचस्प और कीमती है।

दरअसल, जब सोने के आभूषण तैयार किए जाते हैं, तब कटाई, घिसाई और पॉलिशिंग के दौरान सोने की बेहद महीन धूल निकलती रहती है। यह धूल इतनी बारीक होती है कि आंखों से साफ दिखाई भी नहीं देती, लेकिन इसकी कीमत हजारों रुपये तक हो सकती है। काम करते समय यह कण कारीगरों के कपड़ों, एप्रन, मास्क और यहां तक कि बालों में भी चिपक जाते हैं।

इसी वजह से कई ज्वेलरी वर्कशॉप में पुराने कपड़ों को फेंका नहीं जाता, बल्कि उन्हें इकट्ठा करके जलाया जाता है। कपड़े जलने के बाद जो राख बचती है, उसमें से खास तकनीक के जरिए सोने के महीन कण अलग किए जाते हैं। इस प्रक्रिया को रिफाइनिंग कहा जाता है। इससे बड़ी मात्रा में सोना वापस हासिल कर लिया जाता है, जो अन्यथा बर्बाद हो सकता था।

सिर्फ कपड़े ही नहीं, बल्कि ज्वेलरी बनाने वाली दुकानों और फैक्ट्रियों में फर्श की धूल, पानी के फिल्टर और मशीनों की सफाई से निकले कचरे को भी संभालकर रखा जाता है। बाद में इन्हें प्रोसेस करके उनमें मौजूद सोने के कण निकाले जाते हैं। कई बार इनसे ग्रामों में सोना मिल जाता है, जिसकी बाजार कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की बढ़ती कीमतों के कारण अब ज्वेलरी इंडस्ट्री में रिसाइक्लिंग और रिकवरी पर पहले से ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक मशीनों और केमिकल प्रोसेस की मदद से बहुत छोटे कणों को भी दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जा रहा है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में शामिल है। शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में ज्वेलर्स के लिए हर ग्राम सोना बेहद कीमती होता है। यही कारण है कि कारीगर काम के दौरान निकलने वाले सोने के कणों को बचाने के लिए हर संभव तरीका अपनाते हैं।

सोने की ज्वेलरी तैयार करने के पीछे सिर्फ डिजाइन और मेहनत ही नहीं, बल्कि बेहद सावधानी और बारीक प्रबंधन भी शामिल होता है। एक छोटी सी लापरवाही से हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि सुनार अपने कपड़ों तक को जलाकर उनमें छिपे सोने को वापस निकालते हैं।

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