नई दिल्ली: भारत ने विश्व व्यापार संगठन यानी World Trade Organization में चीन की उस मांग को फिलहाल रोक दिया है, जिसमें उसने भारत के खिलाफ विवाद समाधान पैनल गठित करने की अपील की थी। यह मामला भारत द्वारा सोलर सेल, सोलर मॉड्यूल और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर को दिए जा रहे सरकारी समर्थन और प्रोत्साहन उपायों से जुड़ा हुआ है। चीन का आरोप है कि भारत की ये नीतियां वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ हैं।
क्या है पूरा विवाद?
चीन ने इस महीने की शुरुआत में WTO की विवाद निपटान संस्था (DSB) से भारत के खिलाफ पैनल बनाने की मांग की थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में बीजिंग ने औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद चीन ने अगला कदम उठाते हुए विवाद समाधान पैनल के गठन की मांग कर दी।
हालांकि, 22 मई को हुई DSB बैठक में भारत ने चीन के पहले अनुरोध को खारिज कर दिया। WTO नियमों के अनुसार, जिस देश के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है, उसे पहली बार पैनल गठन रोकने का अधिकार होता है। लेकिन अगर चीन अगली बैठक में फिर से यही मांग रखता है, तो पैनल अपने आप गठित हो जाएगा।
चीन ने भारत पर लगाए कौन से आरोप?
चीन का कहना है कि भारत कुछ हाई-टेक उत्पादों पर आयात शुल्क लगाकर और घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता देकर विदेशी कंपनियों के साथ भेदभाव कर रहा है। बीजिंग के मुताबिक, भारत की ये नीतियां WTO के कई अहम समझौतों का उल्लंघन करती हैं। इनमें GATT 1994, सब्सिडी एवं काउंटरवेलिंग मेजर्स समझौता और ट्रेड-रिलेटेड इन्वेस्टमेंट मेजर्स शामिल हैं।
भारत ने दिया करारा जवाब
भारत ने चीन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी सभी नीतियां WTO नियमों के अनुरूप हैं। भारत ने यह भी कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन को विविध और भरोसेमंद बनाने की बात करने वाला वही देश आज विरोध कर रहा है, जिसका दुनिया की सोलर मॉड्यूल वैल्यू चेन पर 80 फीसदी से ज्यादा नियंत्रण माना जाता है।
नई दिल्ली का कहना है कि उसकी नीतियों का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना और सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
भारत की आत्मनिर्भरता पर फोकस
भारत पिछले कुछ वर्षों से सोलर सेक्टर में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसके तहत सरकार ने सोलर सेल और मॉड्यूल पर आयात शुल्क लगाया है। साथ ही, सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय खरीद को बढ़ावा देने, Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) और Production Linked Incentive (PLI) जैसी योजनाएं लागू की गई हैं।
आगे क्या होगा?
अगर चीन अगली WTO बैठक में दोबारा पैनल गठन की मांग करता है, तो विवाद समाधान पैनल का गठन तय माना जा रहा है। यह पैनल जांच करेगा कि भारत द्वारा लगाए गए आयात शुल्क और सोलर सेक्टर को दिए जा रहे प्रोत्साहन WTO की शर्तों के अनुरूप हैं या नहीं।
भारत-चीन व्यापार भी चर्चा में
दिलचस्प बात यह है कि 2025-26 में चीन, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। दोनों देशों के बीच व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया।