रुपये की गिरावट से आम जनता परेशान, लेकिन आईटी अरबपतियों की बढ़ी कमाई!

Saroj kanwar
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नई दिल्ली। भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है और डॉलर के मुकाबले यह 97 रुपये के करीब पहुंच गया है। रुपये की गिरती कीमत ने जहां आम लोगों और बाजार की चिंता बढ़ा दी है, वहीं देश की बड़ी आईटी कंपनियों और उद्योगपतियों के लिए यह स्थिति फायदे का सौदा साबित हो रही है।

दरअसल, रुपये में गिरावट का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को मिलता है, जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। Infosys, Wipro, Tech Mahindra और Tata Consultancy Services जैसी आईटी कंपनियों का अधिकांश कारोबार अमेरिका और यूरोप में फैला हुआ है। इन कंपनियों की कमाई डॉलर में होती है, जबकि उनका बड़ा खर्च भारतीय रुपये में होता है। ऐसे में डॉलर मजबूत होने और रुपये कमजोर पड़ने से इन कंपनियों का मुनाफा बढ़ जाता है।

आईटी सेक्टर में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई है। 20 मई को भी आईटी शेयरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। ओरेकल, कोफोर्ज, इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और विप्रो जैसे शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

बीते एक सप्ताह के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इंफोसिस के शेयर करीब 8 फीसदी तक चढ़ चुके हैं। वहीं टीसीएस और विप्रो ने लगभग 3.5 फीसदी का रिटर्न दिया है। टेक महिंद्रा ने भी निवेशकों को एक हफ्ते में करीब 8 फीसदी का फायदा पहुंचाया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये में कमजोरी आने पर आईटी कंपनियों की डॉलर में होने वाली आय का मूल्य बढ़ जाता है। जब विदेशी कमाई को भारतीय रुपये में बदला जाता है, तो कंपनियों को अधिक राजस्व मिलता है, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन मजबूत होता है। विश्लेषकों के मुताबिक, रुपये में हर 1 फीसदी की गिरावट से आईटी कंपनियों के मार्जिन में लगभग 20 से 30 बेसिस पॉइंट्स तक सुधार देखने को मिल सकता है।

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