Silver Price Today: सोमवार को फ्यूचर ट्रेडिंग में चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 1,832 रुपये टूटकर 2,70,054 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। करीब 1 फीसदी की इस गिरावट के साथ चांदी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोर रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने निवेशकों का रुझान प्रभावित किया है। महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच यह उम्मीद भी मजबूत हुई है कि दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकते हैं, जिसका दबाव कीमती धातुओं पर दिखाई दे रहा है।
लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के मुताबिक, सोमवार को चांदी में भारी बिकवाली दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें करीब 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर थीं, लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड को लेकर चिंता और निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग से बाजार का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा।
उन्होंने आगे बताया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के चलते कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जिससे ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता बढ़ी।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी का कहना है कि सरकार द्वारा चांदी के इंपोर्ट को “फ्री” कैटेगरी से हटाकर “रिस्ट्रिक्टेड” करने के फैसले ने बुलियन मार्केट में बड़ा बदलाव ला दिया है। इससे सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ा और MCX में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जबकि फिजिकल डिमांड भी कमजोर बनी रही।
इस बीच, केंद्र सरकार ने 13 मई को सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी थी। IGST समेत प्रभावी ड्यूटी अब 18 फीसदी से ज्यादा हो गई है। सरकार का उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को कम कर विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह पर नियंत्रण करना है।
वैश्विक बाजार की बात करें तो न्यूयॉर्क के कॉमेक्स एक्सचेंज पर जुलाई कॉन्ट्रैक्ट वाली सिल्वर फ्यूचर्स करीब 3 फीसदी टूटकर 75.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के न्यूक्लियर प्लांट के पास लगी आग के पीछे ईरान या उसके सहयोगी समूहों के ड्रोन हमले की आशंका जताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी कि ईरान के लिए “समय तेजी से निकल रहा है”, क्योंकि युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल ठप पड़ी हुई है।
घरेलू बाजार में एनालिस्ट्स का मानना है कि चांदी के आयात पर सख्ती और बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी के कारण आने वाले समय में कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म कोटक नियो का कहना है कि सप्लाई की कमी, भू-राजनीतिक जोखिम और मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड जैसे फैक्टर्स शॉर्ट टर्म कमजोरी के बावजूद चांदी को सपोर्ट देते रहेंगे।