मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बने संकट के बीच भारत के ईरान के साथ कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अलग समझौता करने की संभावना जताई जा रही है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज़ का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा, ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति के पारंपरिक समुद्री रास्ते पूरी तरह सामान्य होने में अभी लंबा समय लग सकता है।
भारत-ईरान के बीच हो सकती है नई तेल डील
मूडीज़ की जियो-पॉलिटिकल रिस्क रिपोर्ट के मुताबिक, भारत भविष्य में ईरान के साथ द्विपक्षीय समझौते के जरिए तेल आपूर्ति सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। एजेंसी का कहना है कि समुद्री मार्गों पर आवाजाही धीरे-धीरे बहाल हो सकती है, लेकिन यह सामान्य वैश्विक व्यवस्था के बजाय देशों के बीच अलग-अलग समझौतों के जरिए संभव होगी।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भी तलाश रहे विकल्प
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के अलावा चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देश भी ईरान के साथ सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकते हैं। मूडीज़ के अनुसार, लारक द्वीप और ओमान के समुद्री क्षेत्र के आसपास कुछ नए सुरक्षित कॉरिडोर उभर रहे हैं, लेकिन 2026 में भी हालात पूरी तरह सामान्य होना मुश्किल नजर आ रहा है।
तेल बाजार पर बना रहेगा दबाव
एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगर अगले छह महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही दोबारा शुरू भी हो जाती है, तब भी वैश्विक तेल बाजार सप्लाई संकट से जूझता रहेगा। इसका असर ऊर्जा कीमतों, मांग और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर साफ दिखाई दे सकता है।
90 से 110 डॉलर के बीच रह सकता है कच्चा तेल
मूडीज़ का अनुमान है कि इस साल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रह सकती हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में कीमतों में और ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि लंबे समय तक तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। वैश्विक विकास दर में 0.2 से 0.8 प्रतिशत तक की गिरावट संभव बताई गई है।
भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
मूडीज़ ने भारत को सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल किया है, क्योंकि देश अपने लगभग 46 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात पश्चिम एशिया से करता है। महंगे तेल का सीधा असर भारतीय रुपये, चालू खाते के घाटे (CAD) और सरकारी वित्तीय संतुलन पर पड़ सकता है।
इसी को देखते हुए एजेंसी ने 2026 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है।
संघर्ष के बाद 90% तक घटा समुद्री ट्रैफिक
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में शुरू हुआ संघर्ष अब तीसरे महीने में पहुंच चुका है। इस तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के समुद्री कच्चे तेल और LNG व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, लेकिन मौजूदा हालात में यहां जहाजों की आवाजाही में 90 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
बीमा लागत में बढ़ोतरी, सुरक्षा खतरे और समुद्र में बारूदी सुरंगों की आशंका के कारण शिपिंग कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं। इसी बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 90 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक का भारी उतार-चढ़ाव देखा जा चुका है।