आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन एक बेहद आम समस्या बन चुका है। ज्यादातर लोग जानते हैं कि बढ़ा हुआ बीपी दिल, दिमाग और किडनी पर बुरा असर डाल सकता है, लेकिन बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि इसका असर आंखों की रोशनी पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।
World Hypertension Day के अवसर पर, नई दिल्ली स्थित Dr. Agarwals Eye Hospital की सीनियर कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट Dr. Prabhjot Kaur ने बताया कि समय रहते रेटिना की जांच करवाकर आंखों को होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
रेटिना जांच से चल सकता है हाई बीपी का पता
डॉक्टरों के अनुसार, कई बार मरीज आंखों की सामान्य जांच के लिए आते हैं, लेकिन रेटिना की स्थिति देखकर यह अंदाजा लग जाता है कि उनका ब्लड प्रेशर लंबे समय से बढ़ा हुआ है। बाद में जब बीपी चेक किया जाता है, तो मामला सही साबित होता है।
ऐसे में रूटीन रेटिना स्क्रीनिंग सिर्फ आंखों की जांच नहीं होती, बल्कि यह शरीर की ओवरऑल हेल्थ का भी संकेत देती है।
कब बढ़ जाता है आंखों को नुकसान का खतरा?
अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लगातार हाई रहता है या बार-बार ऊपर-नीचे होता है, तो आंखों की नसों पर असर पड़ने लगता है। जोखिम तब और बढ़ जाता है जब मरीज को डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, किडनी डिजीज या खराब लिपिड प्रोफाइल जैसी समस्याएं भी हों।
क्या है हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी?
हाई बीपी की वजह से आंखों की रेटिना की ब्लड सप्लाई प्रभावित होने लगती है। इस स्थिति को हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहा जाता है। इसमें कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे—
- ऑप्टिक डिस्क में सूजन
- रेटिना में ब्लड स्पॉट्स
- कॉटन वूल स्पॉट्स दिखाई देना
- नजर धुंधली होना
- देखने की क्षमता कमजोर पड़ना
समय रहते इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर आपको आंखों से जुड़ी ये समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से संपर्क करें—
- आंखों के सामने धुंधलापन
- रोशनी या कंट्रास्ट कम महसूस होना
- ज्यादा चकाचौंध लगना
- पढ़ने या छोटे काम करने में परेशानी
- अचानक विजन कमजोर होना
हमेशा के लिए जा सकती है आंखों की रोशनी
विशेषज्ञों के मुताबिक, गंभीर मामलों में रेटिना की नसें पूरी तरह ब्लॉक हो सकती हैं। इसे रेटिनल वेन ऑक्लूजन या रेटिनल आर्टरी ऑक्लूजन कहा जाता है। ऐसी स्थिति में ऑप्टिक नर्व डैमेज हो सकती है और व्यक्ति की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जा सकती है।
साल में कितनी बार करवानी चाहिए आंखों की जांच?
हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को कम से कम एक बार बेसलाइन आई चेकअप जरूर करवाना चाहिए। इसमें कॉर्निया से लेकर रेटिना तक की डिटेल जांच की जाती है।
अगर पहली जांच सामान्य आती है, तब भी हर 6 महीने से 1 साल के भीतर फॉलो-अप करवाना जरूरी माना जाता है, चाहे कोई लक्षण हों या नहीं।
सही लाइफस्टाइल से बच सकता है आंखों का नुकसान
डॉक्टरों का कहना है कि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर हाई बीपी से आंखों को होने वाले नुकसान का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसके लिए जरूरी है—
- ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना
- रोजाना एक्सरसाइज करना
- हेल्दी डाइट लेना
- नमक कम खाना
- स्मोकिंग से दूरी बनाना
- तनाव कम करना
आंखों की जांच सिर्फ विजन नहीं, पूरी सेहत का संकेत
एक साधारण रेटिना चेकअप कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत दे सकता है। इसलिए अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, तो नियमित आई चेकअप को नजरअंदाज न करें। यह न सिर्फ आपकी आंखों की रोशनी बचा सकता है, बल्कि आपकी ओवरऑल हेल्थ को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है।