8th Pay Commission: कर्मचारियों की सरकार से बड़ी मांग, बेसिक में DA मर्ज, जानें क्यों है जरूरी?

Saroj kanwar
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8th Pay Commission: केंद्र सरकार सरकारी कर्मचारियों को राहत देने के लिए पुरजोर प्रयास कर रही है। इस समय केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को 8वें वेतन आयोग का इंतजार है। पूरे देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा लगातार जारी है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती है, लेकिन रिपोर्ट तैयार होने और लागू होने में 18 महीने या उससे ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह देरी भारी साबित हो सकती है। इसी कारण DA (महंगाई भत्ता) को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। चलिए ऐसा होने के बाद कर्मचारियों और पेंशनधारकों को क्या फायदा और नुकसान होगा। विस्तार से जानते हैं।

DA और HRA में होगा नुकसान
बता दें ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, अगर 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 18 महीने बाद लागू होती है, तो कर्मचारियों को केवल बेसिक सैलरी और डीए का अंतर मिलेगा। हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (टीए) का एरियर नहीं मिलेगा, जिससे असल में नुकसान शुरू हो जाएगा।

उदाहरण से समझें, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹80,800 और डीए 60% है, तो कुल सैलरी ₹1,29,280 होगी। एचआरए 30% (X कैटेगरी शहर) के हिसाब से ₹24,240 प्रति माह होता है। नई बेसिक सैलरी 2.5 फिटमेंट फैक्टर से ₹2,02,000 हो जाएगी। एचआरए में अंतर 24,230 प्रति माह होगा, और 18 महीने की देरी पर यह ₹4,36,140 का नुकसान बन जाएगा। टीए को जोड़ने पर कुल नुकसान लगभग ₹4.9 लाख तक पहुँच सकता है।

DA मर्ज होने के फायदे

अगर 60% डीए को 1 जनवरी 2026 से बेसिक में जोड़ दिया जाए, तो नई बेसिक सैलरी ₹1,29,280 हो जाएगी। इसी आधार पर 24% एचआरए लगेगा, जो ₹31,027 होगा। ऐसी स्थिति में एचआरए और टीए में अंतर कम हो जाएगा और संभावित कुल नुकसान लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये रह जाएगा। इसी वजह से कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन डीए को फौरन बेसिक में ऐड करने की लगातार मांग कर रहे हैं।

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