100 दिन की कार्य योजना में और बदलाव होने वाले हैं और संभवतः इसे ‘पूज्या बापू’ ग्रामीण रोजगार गारंटी के नाम से ही जाना जाता रहेगा। मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलाव के तहत कार्य गारंटी की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने की संभावना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल इस बदलाव की घोषणा कर सकता है। निकट भविष्य में, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (एमजीएनआरईजीए) के नए नाम को लेकर विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जिसे अब ‘पूज्या बापू’ ग्रामीण रोजगार गारंटी विधेयक 2025 के नाम से जाना जाएगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा नए नाम को मंजूरी मिलने की संभावना है।
मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा एमजीएनआरईजीए से ‘पूज्या बापू’ ग्रामीण रोजगार गारंटी विधेयक, 2025 में परिवर्तन को मंजूरी मिलने की संभावना है।
और क्या विधेयक पारित किए जाएंगे?
मनी कंट्रोल को सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित नामकरण का उद्देश्य रोजगार गारंटी योजना को एक नई पहचान देना है। इसके अलावा, इसका दायरा भी मजबूत और व्यापक बनाया जाएगा। नामकरण प्रस्ताव के साथ-साथ, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विकास भारत शिक्षा संस्थान विधेयक, 2025 को भी पारित किए जाने की उम्मीद है, जिसका उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार लाना है।
100-दिवसीय कार्य नीति में क्या शामिल है?
एमजीएनआरईजीए भारत सरकार के सबसे महत्वपूर्ण ग्रामीण कल्याण कार्यक्रमों में से एक है। इस कार्यक्रम के तहत, ग्रामीण परिवार साधारण शारीरिक श्रम (जिसमें विशेष प्रशिक्षण या कौशल की आवश्यकता नहीं होती) में भाग लेकर प्रति वर्ष 100 दिनों का गारंटीकृत सवैतनिक रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। एमजीएनआरईजीए में पारदर्शिता, सामाजिक लेखापरीक्षा और समय पर मजदूरी भुगतान जैसी कई विशेषताएं हैं जो इसे एक अधिकार-आधारित कार्यक्रम बनाती हैं।
इसके क्या लाभ हैं?
कोविड-19 महामारी के दौरान रोजगार की बढ़ती मांग और प्रवासी श्रमिकों की भारी आमद के मद्देनजर, एमजीएनआरईजीए मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण रहा है। इसके अतिरिक्त, एमजीएनआरईजीए ने उन कई महिलाओं को आकर्षित किया है जो अन्यथा अनौपचारिक श्रम बाजारों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होतीं, क्योंकि यह उन्हें घर के पास ही सवैतनिक रोजगार के अवसर प्रदान करता है।