8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर में चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि इस बार वेतन, पेंशन और भत्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कर्मचारी यूनियनें फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, वार्षिक वेतन वृद्धि में सुधार और महंगाई के हिसाब से नई वेतन संरचना लागू करने की मांग उठा रही हैं। इसी बीच आयोग विभिन्न राज्यों में कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है।
नवंबर 2025 में गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का असर करीब 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ने की संभावना है। फिलहाल आयोग सुझाव और डेटा जुटाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
क्या है 8वां वेतन आयोग?
8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया एक विशेष पैनल है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा कर नई सिफारिशें तैयार करना है। आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित किया जाता है।
इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में प्रोफेसर पुलक घोष और सदस्य सचिव पंकज जैन भी शामिल हैं।
8वें वेतन आयोग से जुड़े 7 बड़े अपडेट
1. कर्मचारी संगठनों के साथ तेज हुई बातचीत
आयोग ने दिल्ली में रेलवे और रक्षा क्षेत्र की यूनियनों के साथ विस्तृत बैठकें शुरू कर दी हैं। इन बैठकों का मकसद कर्मचारियों और पेंशनर्स से सीधे सुझाव लेना है, ताकि उनकी जरूरतों के अनुसार रिपोर्ट तैयार की जा सके।
2. कई राज्यों में होंगी क्षेत्रीय बैठकें
दिल्ली के बाद आयोग तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी परामर्श बैठकें आयोजित करेगा। आने वाले समय में अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी तरह के कार्यक्रम हो सकते हैं।
3. मेमोरेंडम जमा करने की तारीख बढ़ी
आयोग ने सुझाव और मांगपत्र जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है। इससे कर्मचारी यूनियनों और अन्य संगठनों को अपनी मांगें विस्तार से रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
4. न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग तेज
बढ़ती महंगाई और जीवनयापन खर्च को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मौजूदा वेतन संरचना मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।
5. फिटमेंट फैक्टर बना सबसे बड़ा मुद्दा
फिटमेंट फैक्टर को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कई कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 3.833 करने की मांग रखी है, जबकि 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
6. वार्षिक इंक्रीमेंट बढ़ाने की मांग
फिलहाल कर्मचारियों को हर साल 3% की वेतन वृद्धि मिलती है। यूनियनों ने इसे बढ़ाकर 5% से 6% तक करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि बढ़ती महंगाई का असर कम किया जा सके।
7. पेंशन और DA सुधार पर जोर
बैठकों में पेंशन समानता, महंगाई भत्ता (DA) और वेतन गणना प्रणाली में बदलाव को लेकर भी चर्चा हो रही है। कई संगठनों ने महंगाई आधारित वेतन मॉडल लागू करने की मांग की है।
किन संगठनों ने आयोग को दिए सुझाव?
अब तक कई बड़े कर्मचारी संगठनों ने आयोग को अपने सुझाव सौंप दिए हैं। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)
- महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन
- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF)
ये संगठन केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भत्तों और प्रमोशन में भी बदलाव की मांग
सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि कर्मचारी यूनियनों ने हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और अन्य भत्तों में संशोधन की मांग भी रखी है। इसके अलावा तेज प्रमोशन प्रक्रिया और आसान वेतन ढांचे की मांग भी की जा रही है।
DA और पेंशन को लेकर क्या है स्थिति?
कई कर्मचारी संगठनों ने DA कैलकुलेशन में बदलाव और पेंशन समानता लागू करने का मुद्दा उठाया है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
कब लागू हो सकती हैं नई सिफारिशें?
1 जनवरी 2026 को नई वेतन संरचना लागू करने की संभावित संदर्भ तिथि माना जा रहा है। हालांकि आयोग अभी परामर्श और डेटा विश्लेषण के चरण में है। रिपोर्ट्स के अनुसार आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने में लगभग 18 महीने का समय लग सकता है।
अगर सिफारिशें तय तारीख के बाद लागू होती हैं, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर का लाभ भी मिल सकता है।