लिवर खराब होने के संकेत सबसे पहले पैरों में भी दिख सकते हैं, जानिए किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Saroj kanwar
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लिवर हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है, जो बिना रुके कई जरूरी काम करता है। यही वजह है कि इसकी बीमारी अक्सर लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है। लेकिन जब लिवर प्रभावित होने लगता है, तो इसके संकेत सिर्फ पेट या आंखों में ही नहीं, बल्कि पैरों में भी दिखाई दे सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पैरों में लगातार सूजन, कमजोरी या नाखूनों में बदलाव जैसी समस्याएं लिवर की बीमारी की ओर इशारा कर सकती हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।

लिवर खराब होने पर पैरों में क्या लक्षण दिखते हैं?

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट और हेड, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी डॉ. नीरव गोयल के अनुसार, लिवर शरीर के अधिकांश जरूरी प्रोटीन बनाता है। जब लिवर सही तरह से काम नहीं करता, तो शरीर में प्रोटीन की कमी होने लगती है। इससे खून की नसों से तरल पदार्थ बाहर निकलकर पैरों की मांसपेशियों में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन (Pedal Edema) आ जाती है।

इसके अलावा मरीज में ये बदलाव भी दिख सकते हैं:

  • पैरों में लगातार सूजन
  • पैरों में भारीपन और कमजोरी
  • नाखूनों के रंग और बनावट में बदलाव

शरीर के दूसरे हिस्सों में भी दिख सकते हैं संकेत

लिवर की बीमारी बढ़ने पर कई अन्य लक्षण भी सामने आ सकते हैं, जैसे:

  • आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
  • पूरे शरीर में सूजन
  • लगातार थकान और कमजोरी
  • दिन में अधिक नींद आना और रात में नींद कम आना
  • पेट में पानी भरना (Ascites), जो गंभीर लिवर रोग का संकेत हो सकता है।

किन टेस्ट से चलती है लिवर की स्थिति का पता?

अगर डॉक्टर को लिवर संबंधी समस्या का संदेह होता है, तो वे ये जांचें कराने की सलाह दे सकते हैं:

  • कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
  • किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT)
  • प्रोथ्रोम्बिन टाइम (PT)
  • INR टेस्ट

इन जांचों से लिवर की कार्यक्षमता और बीमारी की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है।

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है:

  • रोजाना नियमित व्यायाम करें।
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
  • जंक फूड और अत्यधिक तला-भुना भोजन कम करें।
  • डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर नियंत्रित रखें।
  • हेपेटाइटिस B और C की समय पर जांच और इलाज कराएं।
  • 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराएं और 50 वर्ष के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराते रहें।

नोट: यह जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है। यदि आपके पैरों में लगातार सूजन, पीलिया, अत्यधिक थकान या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराएं।

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