अगर आप रोजाना चिकन खाते हैं और इसे अपनी डाइट का हेल्दी प्रोटीन सोर्स मानते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए जरूरी है। आमतौर पर लाल मांस की तुलना में चिकन को हल्का और आसानी से पचने वाला विकल्प माना जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी रोज की डाइट में चिकन को शामिल करते हैं।
हालांकि, कुछ रिसर्च में अधिक चिकन सेवन और गैस्ट्रिक यानी पेट के कैंसर के बीच संबंध देखने को मिला है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि चिकन खाना सीधे तौर पर पेट के कैंसर का कारण है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस विषय को समझने के लिए चिकन की मात्रा के साथ-साथ उसे पकाने का तरीका और पूरी डाइट को देखना भी जरूरी है।
क्या रोज चिकन खाने से गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा बढ़ता है?
गैस्ट्रिक कैंसर आमतौर पर लंबे समय में विकसित होने वाली बीमारी है। इसके पीछे कई अलग-अलग कारण और जोखिम कारक हो सकते हैं। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को इसका सीधा कारण मानना सही नहीं होगा।
डॉ. राजीव चौधरी, डायरेक्टर-इंटरनल मेडिसिन्स, यथार्थ हॉस्पिटल, फरीदाबाद के मुताबिक, कुछ लोगों में बहुत अधिक चिकन या पोल्ट्री उत्पादों का सेवन पेट और आंतों से जुड़ी समस्याओं के साथ देखा गया है। हालांकि, उपलब्ध संबंध को इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता कि सिर्फ चिकन खाने से कैंसर होता है।
यानी यहां एसोसिएशन और कारण के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है।
रोज चिकन खाने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, समस्या केवल चिकन खाने की नहीं, बल्कि पूरी डाइट और लाइफस्टाइल की हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति के भोजन में रोजाना चिकन तो पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसी चीजें कम हैं, तो उसकी डाइट में विविधता की कमी हो सकती है।
लंबे समय तक संतुलित आहार न लेने से शरीर को जरूरी फाइबर और दूसरे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इसलिए किसी एक प्रोटीन सोर्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने के बजाय डाइट में अलग-अलग पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर माना जाता है।
ज्यादा चिकन के साथ जुड़ी ये आदतें बन सकती हैं परेशानी की वजह
रोज चिकन खाने की आदत कई बार बाहर का खाना, डीप फ्राइड फूड और अधिक तेल-मसाले वाले भोजन से भी जुड़ी होती है। अगर चिकन को बार-बार तला हुआ या बहुत ज्यादा मसालेदार रूप में खाया जाए और साथ में सब्जियों व फाइबर का सेवन कम हो, तो यह ओवरऑल डाइट को कम संतुलित बना सकता है।
इसलिए पेट की सेहत के लिहाज से सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आप चिकन खाते हैं या नहीं। यह भी देखना जरूरी है कि आपकी पूरी डाइट कैसी है और भोजन किस तरीके से तैयार किया जा रहा है।
रोज चिकन खाने का पेट पर क्या असर हो सकता है?
चिकन अपने आप में प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकता है, लेकिन इसे बहुत अधिक तेल में तलकर या बेहद मसालेदार तरीके से लगातार खाने से कुछ लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
ऐसे भोजन से कुछ लोगों में एसिडिटी, अपच या पेट में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इन लक्षणों को सीधे कैंसर का संकेत मानना सही नहीं है।
पेट को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में पर्याप्त फाइबर शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालें फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इसलिए चिकन खाते समय इन खाद्य पदार्थों को भी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।
चिकन पकाने का तरीका भी है महत्वपूर्ण
चिकन कितना हेल्दी रहेगा, इसमें उसे पकाने का तरीका भी अहम भूमिका निभाता है। बहुत ज्यादा तापमान पर खाना पकाने, खासकर मांस को बार-बार तेज आंच पर तलने या जला देने से कुछ ऐसे रासायनिक यौगिक बन सकते हैं, जिन पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं।
इनमें हेटेरोसाइक्लिक एमाइन (HCAs) जैसे कंपाउंड शामिल हैं। अत्यधिक तापमान पर मांस पकाने के दौरान इनका निर्माण हो सकता है और लंबे समय तक इनका अधिक एक्सपोजर स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय माना जाता है।
उबला या ग्रिल्ड चिकन बेहतर विकल्प हो सकता है
अगर आप नियमित रूप से चिकन खाते हैं, तो इसे पकाने के अपेक्षाकृत हल्के तरीकों को प्राथमिकता दी जा सकती है। उबालना, भाप में पकाना या कम तेल में पकाना ऐसे विकल्प हैं जिनमें अत्यधिक तापमान पर जलने या ज्यादा तलने की समस्या कम हो सकती है।
चिकन को सब्जियों और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ खाने से भोजन अधिक संतुलित भी बनाया जा सकता है।
क्या चिकन पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?
नहीं, केवल गैस्ट्रिक कैंसर के डर से चिकन को पूरी तरह डाइट से हटाने की जरूरत नहीं है। चिकन प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का स्रोत हो सकता है। असली फोकस संतुलित डाइट, उचित मात्रा और खाना पकाने के स्वस्थ तरीकों पर होना चाहिए।
अगर आपको लगातार पेट दर्द, लंबे समय तक अपच, बिना वजह वजन कम होना, निगलने में परेशानी या कोई अन्य लगातार पाचन संबंधी समस्या हो रही है, तो खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। चिकन खाने और गैस्ट्रिक कैंसर के बीच संबंध को सीधे कारण के रूप में नहीं समझना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लगातार बने रहने वाले लक्षण के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें।