डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार कमजोरी का रुझान थम नहीं रहा है। आज भारतीय मुद्रा ने 96.86 का अब तक का सबसे निचला स्तर छू लिया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
शेयर बाजार पर भी आज दबाव देखने को मिला। जियो-पॉलिटिकल तनाव और अन्य वैश्विक कारणों के बीच बीएसई सेंसेक्स में करीब 670 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 74,529.41 के स्तर तक फिसल गया। वहीं निफ्टी 50 भी लगभग 220 अंक टूटकर 23,397.30 पर आ गया।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है और आज यह अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 96.86 तक पहुंच गया। इस कमजोरी ने बाजार की धारणा को और अधिक प्रभावित किया है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने हुए हैं। ब्रेंट क्रूड इस समय करीब 110.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव की आशंका बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार की बात कही, से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस तनाव ने निवेशकों में डर का माहौल पैदा किया है और सीजफायर को लेकर भी आशंकाएं बढ़ी हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मंगलवार को ही उन्होंने लगभग 2,457 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
इसके अलावा, अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड भी एक कारण है। बेहतर रिटर्न के चलते निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों में निवेश कर रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बन रहा है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है, इसलिए किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।)