28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। हाल के घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘एपिक फ्यूरी’ नाम से सैन्य अभियान चलाया, जिसके बाद क्षेत्र में स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई। इसके जवाब में ईरान ने अबूधाबी और दुबई जैसे आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई।
मार्च महीने तक दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी रहा, हालांकि अप्रैल में हालात को नियंत्रित करने और सीजफायर की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए। इसी दौरान कुछ अस्थायी सहमतियों की भी खबरें सामने आईं, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने को उत्सुक है और यह संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है। उनके अनुसार, वैश्विक बाजार में तेल की पर्याप्त उपलब्धता है, जिससे आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि “इतना ज्यादा तेल मौजूद है कि कीमतें तेजी से नीचे आ सकती हैं,” और इसी वजह से युद्ध समाप्त करने की दिशा में तेजी आने की संभावना है।
हालांकि, 28 फरवरी के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का कदम उठाया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई और ऊर्जा संकट की चिंताएं बढ़ गईं।
8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के लिए सीजफायर की घोषणा की गई थी, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर तनाव फिर से उभरता रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और नाकेबंदी को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
स्थिति फिलहाल नाजुक बनी हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष स्थायी समझौते पर नहीं पहुंचते, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर जारी रह सकता है।