पासपोर्ट छिपाने पर खतरे में भारतीय नागरिकता! गृह मंत्रालय का बड़ा बदलाव, 15 दिनों में करना होगा यह काम

Saroj kanwar
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भारत की नागरिकता से जुड़े नियमों में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के नागरिकता आवेदकों के लिए कई नई शर्तें लागू की गई हैं। इन बदलावों का उद्देश्य नागरिकता प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और डिजिटल बनाना बताया जा रहा है।


नागरिकता नियमों में क्या हुआ नया बदलाव?

गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 18 के तहत ‘नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026’ को जारी किया है। इसके तहत 2009 के नागरिकता नियमों की अनुसूची IC में एक नया प्रावधान (पैराग्राफ iiiA) जोड़ा गया है।

नए नियमों के अनुसार अब नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को यह स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि उनके पास पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान का कोई वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है या नहीं।

यदि किसी आवेदक के पास इन देशों का पासपोर्ट मौजूद है, तो उसे उसकी पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें शामिल हैं:

  • पासपोर्ट नंबर
  • जारी करने की तारीख
  • जारी करने का स्थान
  • समाप्ति तिथि

भारतीय नागरिकता मिलने के बाद 15 दिन में पासपोर्ट सरेंडर जरूरी

नए प्रावधानों के तहत, जैसे ही किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता मिलती है, उसे 15 दिनों के भीतर अपना विदेशी पासपोर्ट संबंधित अधिकारियों को जमा करना अनिवार्य होगा।

इसके लिए आवेदक को संबंधित पोस्ट ऑफिस के वरिष्ठ अधीक्षक या अधीक्षक को लिखित रूप में सहमति भी देनी होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम रिकॉर्ड मैनेजमेंट और सत्यापन प्रक्रिया को अधिक मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।


डिजिटल नागरिकता प्रक्रिया की ओर सरकार का कदम

इसी दौरान सरकार ने नागरिकता प्रणाली में कई डिजिटल सुधार भी लागू किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव इलेक्ट्रॉनिक ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (e-OCI) कार्ड की शुरुआत है।

अब OCI से जुड़ी कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध होंगी, जिससे प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पेपरलेस हो जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य विदेश में रहने वाले भारतीयों को कागजी झंझट से राहत देना है।


नाबालिगों से जुड़े नियमों में भी सख्ती

नए दिशानिर्देशों के तहत नाबालिगों के डुअल पासपोर्ट मामलों की जांच अब और अधिक कड़ी कर दी गई है। ऐसे मामलों में विस्तृत वेरिफिकेशन और निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके।


बायोमेट्रिक डेटा देना अनिवार्य

नए नियमों में नागरिकता आवेदन प्रक्रिया के दौरान बायोमेट्रिक डेटा देना भी आवश्यक कर दिया गया है। आवेदकों की सहमति से यह डेटा सुरक्षित सिस्टम में संग्रहीत किया जाएगा।

इससे भविष्य में फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन और ऑटोमैटिक एनरोलमेंट जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे पूरी प्रणाली ज्यादा तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी।


निष्कर्ष

केंद्र सरकार के ये नए नागरिकता नियम डिजिटल गवर्नेंस और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। जहां एक तरफ प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्यापन और दस्तावेजी नियमों को और सख्त किया जा रहा है।

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