जंग में भी नहीं हुई LPG की किल्लत! दो महीने बाद खुला राज, सरकार कहां से भर-भरकर लाई गैस

Saroj kanwar
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में शिपिंग बाधाओं का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान कई देशों में पेट्रोल पंपों और गैस डिलीवरी के लिए लंबी कतारों के वीडियो सामने आए, जिससे सप्लाई संकट की आशंका और गहरी हो गई।

हालांकि, इन परिस्थितियों के बीच भारत सरकार ने देश में एलपीजी (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सरकार ने साफ किया है कि घरेलू स्तर पर रसोई गैस की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

अमेरिका से रिकॉर्ड LPG आयात, पहली बार बड़ा बदलाव

भारत ने इस संकट के दौरान अपनी पारंपरिक सप्लाई चेन में बदलाव करते हुए अमेरिका से एलपीजी आयात को बढ़ाया है। यह पहली बार है जब एक महीने में अमेरिका से भारत आने वाला LPG आयात 10 लाख मीट्रिक टन के स्तर को पार कर गया है।

हालांकि, इस बदलाव के चलते भारतीय रिफाइनर्स को अपेक्षाकृत अधिक कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को लगातार सप्लाई उपलब्ध कराना रही।

मिडिल ईस्ट पर निर्भरता और बदलती रणनीति

अब तक भारत अपनी LPG जरूरतों का लगभग 90% हिस्सा मिडिल ईस्ट देशों से आयात करता रहा है, जिसकी मासिक औसत खपत करीब 20 लाख टन है। लेकिन हाल के भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते प्रभावित होने से सप्लाई में रुकावट आने लगी।

इसी कारण भारत ने वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख किया और अमेरिकी सप्लाई को तेजी से बढ़ाया गया।

अप्रैल में गिरावट, मई में रिकवरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने में LPG आयात घटकर लगभग 6.96 लाख टन रह गया था। सप्लाई में आई इस गिरावट को देखते हुए भारतीय रिफाइनर्स ने तुरंत नए स्रोतों की तलाश शुरू की।

इसके बाद मई में आयात में सुधार देखा गया और यह बढ़कर लगभग 11.5 लाख टन तक पहुंच गया। जून में इसमें और वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

जून में 11–12 लाख टन आयात का अनुमान

अनुमान है कि जून महीने में भारत को अमेरिका से 11 से 12 लाख टन LPG प्राप्त हो सकता है। सरकार पहले ही अमेरिकी हिस्सेदारी बढ़ाकर लगभग 10% तक करने की योजना पर काम कर रही थी, जिसे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने और तेज कर दिया है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिक लक्ष्य देश में हर घर तक बिना बाधा LPG की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

घरेलू उत्पादन और नए सप्लाई स्रोतों पर जोर

सरकार ने घरेलू रिफाइनर्स को उत्पादन बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर तक ले जाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही PNG (Piped Natural Gas) नेटवर्क के विस्तार पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति को और स्थिर बनाया जा सके।

मिडिल ईस्ट से सप्लाई भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। जून में UAE से 3 से 4 लाख टन LPG और कुवैत से लगभग 45,000 टन आपूर्ति की संभावना जताई गई है।

केपलर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, मई में भारत ने अमेरिका से लगभग 6.5 लाख टन LPG आयात किया था, जबकि UAE से केवल 1.34 लाख टन की सप्लाई हुई थी।

निष्कर्ष

वैश्विक तनाव के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को तेजी से बदला है। अमेरिका सहित नए सप्लाई स्रोतों को जोड़कर सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि देश में रसोई गैस की आपूर्ति पर कोई असर न पड़े और आम उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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