क्रेडिट कार्ड फ्रॉड पर RBI का बड़ा फैसला: अब धोखाधड़ी होने पर बैंक अस्थायी रूप से ग्राहक को राशि लौटाएंगे, नहीं रहेगा टेंशन

Saroj kanwar
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी को लेकर ग्राहकों के हित में एक महत्वपूर्ण संशोधित फ्रेमवर्क जारी किया है। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक द्वारा क्रेडिट कार्ड फ्रॉड की शिकायत दर्ज की जाती है, तो बैंक को पांच दिनों के भीतर “शैडो रिवर्सल” के तहत अस्थायी रूप से राशि वापस करनी होगी।

शिकायत देर से मिलने पर तय होगी जिम्मेदारी

RBI के मुताबिक, यदि डिजिटल धोखाधड़ी की शिकायत पांच दिन से अधिक समय बाद दर्ज की जाती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी बैंक की पॉलिसी के आधार पर तय की जाएगी। इसका मतलब है कि देरी से रिपोर्ट करने पर मुआवजे की प्रक्रिया अलग हो सकती है।

डिजिटल ट्रांजैक्शन की सुरक्षा होगी मजबूत

नए दिशानिर्देशों के तहत बैंकों को अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को और अधिक सुरक्षित बनाना होगा, ताकि ग्राहक इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल बिना किसी डर के कर सकें। RBI ने साफ कहा है कि बैंकों को डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा के लिए मजबूत तकनीकी और परिचालन व्यवस्था लागू करनी होगी।

500 रुपये से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर SMS अलर्ट अनिवार्य

नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि 500 रुपये से अधिक के सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को तुरंत SMS अलर्ट भेजा जाएगा। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इसके अलावा, बैंकों को यह भी रिकॉर्ड रखना होगा कि अलर्ट भेजे जाने के बाद ग्राहक ने कोई प्रतिक्रिया दी या नहीं, और यह रिकॉर्ड समय और तारीख के साथ सुरक्षित रखना होगा।

एनबीएफसी के लिए नए नियम

RBI ने यह भी घोषणा की है कि जिन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के पास 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति है, उन्हें अब “अपर लेयर” में शामिल किया जाएगा। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों पर पहले से अधिक सख्त नियामकीय नियम लागू होंगे।

डिजिटल बैंकिंग ग्राहकों के लिए राहत

मार्च में जारी ड्राफ्ट प्रस्तावों के बाद हितधारकों ने सुझाव दिया था कि क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के मामलों में अस्थायी क्रेडिट सुविधा शामिल की जाए। RBI ने इन सुझावों को स्वीकार करते हुए इसे नए फ्रेमवर्क का हिस्सा बना दिया है।

कब से लागू होंगे नए नियम?

ये सभी संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। इसका उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाना और ग्राहकों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

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